जशपुर
छत्तीसगढ़ के शिक्षकों के लिए एक अहम और राहत भरी खबर सामने आई है। पूर्व सेवा गणना( संविलियन पूर्व सेवा) को लेकर लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई में हाईकोर्ट ने शिक्षकों(LB संवर्ग) के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने राज्य सरकार की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती दी गई थी।
यह पूरा मामला चिरमिरी नगर निगम में 1998 से शिक्षा कर्मी के रूप में पदस्थ शिक्षक(LB संवर्ग) राजेंद्र प्रसाद पटेल से जुड़ा है। उन्होंने अपने वकील संजीव वर्मा जी के माध्यम से हाईकोर्ट में (WPS 777/2021) याचिका दायर कर संविलियन निर्देश 01 की कंडिका 04 &06 को चैलेंज करते हूए यह मांग की थी कि उनकी पूर्व सेवा को पुरानी पेंशन योजना (OPS) की पात्रता में शामिल किया जाए। याचिका में कहा गया था कि संविलियन (मर्जर) के बाद भी उनकी पूर्व सेवा को पेंशन गणना में नहीं जोड़ा जा रहा है, जो उनके साथ अन्याय है।
इस मामले में पहले हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह पूर्व सेवा को पुरानी पेंशन योजना में शामिल करने पर विचार करे। इसके लिए सरकार को 120 दिनों का समय भी दिया गया था। हालांकि, इस निर्देश पर अमल करने के बजाय राज्य सरकार ने सिंगल बेंच के फैसले को चुनौती देते हुए डबल बेंच में अपील दायर कर दी।आज 23 अप्रैल 2026 को डिवीजन बेंच में हुई सुनवाई के दौरान याचिका कर्ता के वकील संजीव वर्मा तथा शिक्षक राजेंद्र प्रसाद पटेल भी पक्षकार के रूप में शामिल रहे। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली पीठ में हुई, जहां राज्य सरकार ने अपने पक्ष में संविलियन की शर्तों का हवाला दिया। सरकार का तर्क था कि संविलियन के समय जो शर्तें तय की गई थीं, उसी के आधार पर पेंशन का निर्धारण किया जाना चाहिए।सरकार का तर्क था कि शिक्षा कर्मी 30.06.2018 तक शासकीय कर्मचारी नहीं थे इसलिए उस अवधि की सेवा पेंशन योग्य नहीं मानी जा सकती शिक्षा विभाग के आदेश दिनाँक 16.02.2021 में शासन ने पूर्व में स्पष्ट कर चुका है साथ ही वित्त सचिव ने भी अपने हलफनामा में साफ कहा है कि 2012 में NPS क्यों लिए 10 वर्ष बाद OPS लागू करने की मांग कर रहे हैं इसलिए यह देरी का मामला के कारण भी खारिज करने योग्य है तब माननीय CJ साहब ने तीखी टिपपणी करते हुए बोले की वित्त सचिव भगवान् हैं क्या इतनी बड़ी संख्या में प्रभावित लोग बिना पेंशन सेवा निवृत्त हो रहे हैं और आप लोग सभी को कोर्ट में खड़ा कर दे रहे हैं की जिंदगी भर कोर्ट का चक्कर लगाए याचिका कर्ता के वकील संजीव वर्मा जी ने कोर्ट को बताया कि हमने कंडिका 04 और 06 को चैलेंज किया है एक तरफ़ तो ये 8 वर्ष की पूर्व सेवा जोड़कर संविलियन कर रहे हैं पूर्व सेवा को मान्यता दे रहे हैं दूसरी तरफ पेंशन के लिए पूर्व सेवा की गड़ना नहीं कर रहे हैं इतना सुनते ही कोर्ट ने रिट अपील खारिज कर दिया। छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन जिला
जशपुर जिलाध्यक्ष अजय कुमार गुप्ता ने इस ऐतिहासिक फैसले पर कहा कि यह सिर्फ एक शिक्षक की जीत नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के समस्त एलबी संवर्ग शिक्षकों के वर्षों पुराने संघर्ष, धैर्य और न्याय की लड़ाई की बड़ी विजय है। माननीय हाईकोर्ट द्वारा राज्य सरकार की अपील खारिज किया जाना यह साबित करता है कि शिक्षकों की पूर्व सेवा की गणना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि वर्षों तक शिक्षा कर्मी के रूप में सेवा देने वाले साथियों ने कठिन परिस्थितियों में शिक्षा व्यवस्था को संभाला है। यदि वही सेवा संविलियन में मान्य है, तो पेंशन निर्धारण में उसे नकारना पूर्णतः अन्यायपूर्ण था। न्यायालय के इस फैसले से हजारों शिक्षकों को पुरानी पेंशन योजना का मार्ग प्रशस्त होगा और सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक जीवन की उम्मीद जगी है।
अजय कुमार गुप्ता ने इस लड़ाई को मजबूती से लड़ने वाले याचिकाकर्ता राजेंद्र प्रसाद पटेल, अधिवक्ता संजीव वर्मा तथा सभी सहयोगी साथियों को बधाई देते हुए कहा कि यह फैसला आने वाले समय में पूरे शिक्षक समुदाय के लिए मील का पत्थर साबित होगा। अब सरकार को चाहिए कि बिना अनावश्यक विलंब किए न्यायालय के आदेश का पालन करे और सभी पात्र शिक्षकों को पूर्व सेवा गणना का लाभ प्रदान करे।

