42 वर्ष पहले जून 1984 में श्री दरबार साहिब अमृतसर में हुई सैन्य कार्यवाही आपरेशन ब्लू स्टार की 42वीं बरसी पर जबलपुर की सिक्ख संगत द्वारा गुरुद्वारा 7साहिब में बलिदानियों की स्मृति में एक श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जिसमें इस आपरेशन में दिवंगत हुए निर्दोष बच्चों, बूढ़ों एवं निर्दोष श्रद्धालुओं को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए,जून 1984 की घटनाओं को काले दिन के तौर पर स्मरण किया।
इस श्रद्धांजलि सभा में बड़ी संख्या में सिक्ख समाज के प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
गुरुद्वारे में चौपाई साहिब के पाठ, मूल मंत्र के जाप व अरदास के माध्यम से आपरेशन ब्लू स्टार में दिवंगत हुए श्रद्धालुओं की आत्मिक शांति व उनके स्वजनों की चढ़दी कला के लिए विशेष अरदास की गई।
ऑपरेशन ब्लू स्टार सिक्ख इतिहास का एक अत्यंत संवेदनशील और पीड़ादायक अध्याय है। जून 1984 में गुरु अर्जुन देव जी के शहीदी दिवस के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्री हरमंदिर साहिब में मौजूद थे। उसी दौरान हुई सैन्य कार्रवाई में अनेक निर्दोष श्रद्धालुओं, बच्चों ,
महिलाओं,,बूढ़ोऔर युवाओं की जान चली गई थी। इस घटना की पीड़ा आज भी सिक्ख समाज के मन में गहराई से विद्यमान है। यह केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि लाखों सिक्खों की भावनाओं और आस्था से जुड़ा विषय है। समाज का मानना है कि उस दौरान जान गंवाने वाले श्रद्धालुओं को सम्मानपूर्वक शहीद का दर्जा दिया जाना चाहिए, ताकि उनके बलिदान और स्मृति को उचित सम्मान मिल सके। इस सभा में सिक्ख समाज की ओर से जबलपुर सिक्ख संगत के प्रधान एवं पूर्व मंत्री हरेंद्रजीत सिंह बब्बू के माध्यम से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नाम एक ज्ञापन भी भेजा गया। इस ज्ञापन में मांग की गई है कि ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान मारे गए निर्दोष श्रद्धालुओं जिसमें बच्चे बूढ़े वो महिलाएं भी शामिल थीं,इनको आधिकारिक रूप से शहीद घोषित किया जाए तथा उनके परिजनों को सरकारी नौकरी और उचित आर्थिक मुआवजा प्रदान किया जाए। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि ऑपरेशन के दौरान सिख रेफरेंस लाइब्रेरी सहित कई ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों को नुकसान पहुंचा था। समाज ने मांग की है कि इन धरोहरों के संरक्षण, पुनर्स्थापना और शोध कार्यों के लिए विशेष आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए, जिससे आने वाली पीढ़ियां अपने इतिहास और विरासत से परिचित हो सकें। समूह सिक्ख संगत ने भारत सरकार से आग्रह किया कि देश की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाया जाए तथा भविष्य में ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न न हों।
इस इस श्रद्धांजलि सभा में दलवीर सिंह जस्सल, गुलजीत सिंह साहनी,रवींद्र सिंह दुआ,कुक्कू सूदन, काले उप्पल,हरिंदर सिंह रेखी , धनवीर सिंह आनंद, सुखबीर सिंह,रमिंदर सिंह लांबा , संगत सिंह बतरा , जसप्रीत बतरा, रक्का सिंह आदि उपस्थित थे।

