Tuesday, March 10, 2026
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चिकित्सकों की सतर्कता से बची प्रसूता की जान,पेरिपार्टम कार्डियक अरेस्ट के बाद सफल इलाज

रायपुर,

रायगढ़ मेडिकल कॉलेज के चिकित्सको के प्रयास से लौटी दिल की धड़कन

स्व. श्री लखीराम अगव्राल स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध संत बाबा गुरु घासीदास जी स्मृति शासकीय चिकित्सालय रायगढ़ के चिकित्सकों की तत्परता, उच्चस्तरीय चिकित्सा प्रबंधन और समन्वित टीमवर्क के चलते एक 23 वर्षीय प्रथम गर्भ प्रसूता को पेरिपार्टम कार्डियक अरेस्ट जैसी अत्यंत गंभीर स्थिति से सफलतापूर्वक बचा लिया गया।

मरीज 23 वर्षीय महिला जो पहली बार गर्भवती थीं, को प्री-एक्लेम्पसिया (गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप) की शिकायत थी। जो अत्यधिक गंभीर स्थिति में निजी अस्पताल से मेडिकल कॉलेज के आपातकालीन विभाग में 02 फरवरी 2026 को दोपहर लगभग 12 बजे अत्यधिक उच्च रक्तचाप और सांस लेने में गंभीर तकलीफ के साथ लाया गया । चिकित्सक द्वारा जांच में पल्मोनरी एडीमा (फेफड़ों में पानी भरना) की पुष्टि हुई, जो जानलेवा स्थिति होती है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल आपातकालीन सिजेरियन सेक्शन (LSCS) का निर्णय लिया गया। ईलाज के दौरान मरीज को अचानक पेरिपार्टम कार्डियक अरेस्ट (हृदय गति रुकना) हो गया ।

डॉ . ए.एम. लकड़ा (विभागाध्यक्ष एनेस्थीसिया ) ने बताया कि हमारी चिकित्सकीय टीम ने तुरंत स्थिति की पहचान कर उच्च गुणवत्ता वाली सीपीआर (High Quality CPR) प्रारंभ की। त्वरित और समन्वित प्रयासों से मरीज की हृदयगति पुनः स्थापित की गई। इसके बाद मरीज को वेंटिलेटर सपोर्ट पर आईसीयू में रखा गया, जहां गहन निगरानी एवं व्यवस्थित पोस्ट-कार्डियक अरेस्ट केयर प्रदान की गई।

लगभग तीन दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर रहने के बाद मरीज की स्थिति में लगातार सुधार हुआ। विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में धीरे-धीरे वेंटिलेटर हटाया गया और अंततः 12 फरवरी 2026 को मरीज को आईसीयू से वार्ड में शिफ़्ट किया गया ।आज मरीज को सफलतापूर्वक ईलाज कर डिस्चार्ज किया गया ।

इस जटिल और जीवनरक्षक प्रक्रिया का संचालन एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद मसीह लकड़ा के साथ स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. टी.के. साहू  एवम डॉ. चंद्रभानु पैंकरा, डॉ. अशोक सिंह सिदार, डा. लेश पटेल , डॉ. अनीश ,डॉ. लक्ष्मी यादव, डॉ. अमित भोई, डॉ. सुभाष राज तथा ऑपरेशन थिएटर (OT) स्टाफ ने इस चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में उत्कृष्ट सहयोग रहा ।

अस्पताल अधीक्षक डॉ एम.के. मिंज ने कहा कि यह सफलता समय पर पहचान (Early Recognition), उच्च गुणवत्ता वाली सीपीआर, त्वरित निर्णय, और बहु-विषयक समन्वित टीम के प्रयासों का परिणाम है।यह घटना दर्शाती है कि यदि उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था में विशेषज्ञ चिकित्सकीय देखरेख उपलब्ध हो, तो अत्यंत गंभीर परिस्थितियों में भी जीवन बचाया जा सकता है।

Ravindra Singh Bhatia
Ravindra Singh Bhatiahttps://ppnews.in
Chief Editor PPNEWS.IN. More Details 9755884666
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