Thursday, April 23, 2026
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जल जीवन मिशन ज़मीन पर नाकाम! मुख्यमंत्री के आश्वासन के बावजूद गांव प्यासा, राष्ट्रपति के दत्तक पुत्रों को मीलों दूर से पानी लाना पड़ रहा है

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही. जल जीवन मिशन के दावों की पोल गौरेला विकासखंड की ग्राम पंचायत चुकतीपानी में खुलती नजर आ रही है. जहां एक ओर सरकार हर घर नल से जल पहुंचाने का दम भर रही है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले बैगा आदिवासी आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए मीलों का सफर तय करने को मजबूर हैं.

​मुख्यमंत्री की फटकार भी बेअसर

​मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीते वर्ष मई 2025 में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की जन चौपाल के दौरान ग्रामीणों ने सीधे उनसे पानी की समस्या की शिकायत की थी. मुख्यमंत्री ने मौके पर मौजूद इंजीनियर को कड़ी फटकार लगाते हुए जल्द समाधान के निर्देश दिए थे. लेकिन विडंबना है कि साल भर बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है.

​तकनीकी चूक या लापरवाही?

​चुकतीपानी का बाजारडाड़ क्षेत्र, जो मैकल पर्वत की तराई में बसा है, अपनी जटिल भौगोलिक स्थिति के कारण कम भूजल स्तर (Groundwater level) की समस्या से जूझ रहा है. स्थानीय निवासियों का कहना है कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) ने यहां की भौगोलिक स्थिति को नजरअंदाज किया. ​मौके पर अधूरी बोरिंग या पर्याप्त गहराई तक बोरिंग ही नहीं की गई जिसका नतीजा यह हुआ कि भूजल स्तर पहले से कम था और गर्मियों की शुरुआत में जल स्तर नीचे गिरते ही नल सूख गए. यहां एक ही स्थान पर तीन हैंडपंप और बोरिंग कर दी गई है, जिसके कारण ग्रामीणों को बहुत दूर से चलकर पानी के लिए आना पड़ता है.

​बैगा विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष सीता राम बैगा और स्थानीय समिति के अध्यक्ष प्रेम लाल बैगा ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि पिछले साल ‘अमानानाला’ से लिफ्ट सिस्टम के जरिए पानी लाने का वादा किया गया था. पाइपलाइन भी बिछाई गई, लेकिन उसमें आज तक पानी की एक बूंद नहीं टपकी. आज भीषण गर्मी में इंसान तो क्या, मवेशियों के लिए भी पीने का पानी जुटाना चुनौती बन गया है.

​जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ता विभाग

​जब इस अव्यवस्था पर सवाल उठाए गए, तो PHE विभाग के कार्यपालन अभियंता (EE) उनका कहना है कि उन्होंने फरवरी 2026 में यह प्रोजेक्ट पंचायत को हैंडओवर कर दिया है. आगे की जिम्मेदारी पंचायत अपने स्तर से देखेगी, गांव से सूचना प्राप्त हुई तो हमने अपने स्टाफ को वहां भेजा है. इस दौरान कुछ जगह कमियां पाई गई है, उन्हें हर संभव प्रयास कर दूर किया जा रहा है. साथ ही हैंडपंप को दुरुस्त करने का काम तत्काल कर रहे है. आगे भी पानी की समस्या हुई तो निराकरण किया जाएगा.

सवाल यह उठता है कि ​जब इंफ्रास्ट्रक्चर से पानी ही नहीं निकल रहा, तो ग्राम पंचायत सूखे पाइपों और नलों का क्या करेगी? ​संरक्षित जनजाति में आने वाले बैगा परिवारों की संवेदनहीनता को दर्शाती है. यदि तत्काल प्रभाव से गहराई तक बोरिंग या स्थायी जल स्रोत की व्यवस्था नहीं की गई, तो इस साल की गर्मी भी इन परिवारों के लिए किसी त्रासदी से कम नहीं होगी. क्या सरकार का ‘जल जीवन मिशन’ केवल आंकड़ों तक सीमित रहेगा या इन आदिवासियों की प्यास बुझेगी?

Ravindra Singh Bhatia
Ravindra Singh Bhatiahttps://ppnews.in
Chief Editor PPNEWS.IN. More Details 9755884666
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