Friday, April 10, 2026
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पूर्व IAS अनिल टुटेजा की जमानत याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी—वर्षों तक सत्ता का लाभ उठाया, अब प्रक्रिया का पालन करना होगा

दिल्ली। जेल में बंद पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा की उस याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ नए एफआईआर दर्ज करने से रोकने और पुराने कायम हुए सभी मामलों में एक साथ जमानत देने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आप सत्ता के करीबी अफसर में शामिल थे और आपने वर्षों तक सत्ता का आनंद लिया है। यह मामला सरकारी धन के निजी हाथों में जाने का है। आपको कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना होगा।

पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा की कांग्रेस सरकार के दौरान राज्य में तूती बोलती थी। वे आबकारी घोटाले से लेकर डीएमएएफ, नान घोटाला, कस्टम मिलिंग घोटाला,कोल घोटाले के आरोपी हैं। हाल ही में उन्हें एक मामले में हाईकोर्ट से जमानत मिली है। बाकी मामलों के लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी, जिसमें उन्होंने सारे मामलों में एक साथ जमानत और जांच एजेंसियों को सभी मामलों में एक साथ पूछताछ करने और ट्रायल पूरा होने तक उन्हें बेल देने के निर्देश देने की मांग करते हुए नए मामले दर्ज करने पर भी रोक लगाने की मांग की थी।

सोमवार को उनके मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जयमाल्या बागची की डिवीजन बेंच में हुई। अनिल टुटेजा की तरफ से अधिवक्ता शोएब आलम उपस्थित हुए थे। उन्होंने अपने तर्क में बताया है कि जब अनिल टुटेजा एक मामले में बेल पाने के करीब थे तब जांच एजेंसियों ने उन्हें दूसरे मामले में गिरफ्तार करने की अनोखी काबिलियत दिखाई है। अदालत को बताया गया कि टुटेजा अप्रैल 2024 से जेल में है और उन्हें छत्तीसगढ़ की ईओडब्लू और ईडी की ओर से लगातार कस्टडी में पूछताछ के लिए अपनी मर्जी से कहा है।

टुटेजा के अधिवक्ता ने आरोप लगाया है कि छत्तीसगढ़ सरकार और प्रवर्तन निदेशालय द्वारा उन्हें हर बार किसी लंबित मामले में जमानत मिलने पर एक नए मामले में हिरासत में ले लेने से उनके व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन भी हो रहा है। उन्हें सिर्फ सलाखों के पीछे रखने के लिए किसी एक मामले में गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए। अधिवक्ता ने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी जमानत रद्द किए जाने के बाद वह पिछले 20 महीनों से जेल में बंद है और जब वह पहले से हिरासत में है तो उन्हें अन्य मामलों में रिमांड पर नहीं लिया जा सकता। जमानत पर रिहा होने का इंतजार करने के बजाय सभी मामलों में उनसे पूछताछ की जानी चाहिए। इन सभी मामलों में एक ही पैटर्न में दिखाई दे रहा है।

तर्कों को सुनने के पश्चात अदालत ने कहा कि ऐसा नहीं है कि यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है।। आप एक नौकरशाह हैं जिन्होंने इतने वर्षों तक सत्ता का आनंद लिया है। यह मुद्दा सार्वजनिक धन के निजी हाथों में जाने का है यदि आप इसमें शामिल हैं तो आपको न्यायिक प्रक्रिया का पालन करना पड़ेगा। पीठ ने कहा कि आपका तर्क भावनात्मक रूप से तो सही है लेकिन कानूनी रूप से सही नहीं है। कानूनी दृष्टिकोण से देखा जाए तो आप का तर्क स्वीकार नहीं किया जा सकता,क्योंकि जब एजेंसी ही आपकी गिरफ्तारी के लिए तैयार नहीं है तो हम आपकी गिरफ्तारी कैसे लागू कर सकते हैं।

सीजेआई की बेंच ने कहा कि कोर्ट ने उन सभी मामलों में आपको जमानत दी है जहां विवेक का इस्तेमाल किया गया था लेकिन हम सभी मौजूदा और भविष्य के मामले में जमानत देने का कोई जरूरी आदेश नहीं दे सकते। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर आपको गिरफ्तारी का डर है तो वह गिरफ्तारी के बाद जमानत या अगली भी जमानत मांग सकते हैं इसके साथ ही यह भी निर्देश दिए कि अगर वह एक हफ्ते के अंदर जमानत याचिका दायर करते हैं तो हाई कोर्ट को दो से चार हफ्ते के अंदर प्राथमिकता के आधार पर उसे पर फैसला करना होगा।

Ravindra Singh Bhatia
Ravindra Singh Bhatiahttps://ppnews.in
Chief Editor PPNEWS.IN. More Details 9755884666
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