
जशपुर। जिला भाजपा कार्यालय जशपुर में बुधवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में बलरामपुर जिला संगठन प्रभारी एवं पूर्व जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश सिन्हा ने चुनाव आयोग, SIR और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों पर तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष लगातार चुनावों में पराजित हो रहा है और अपनी राजनीतिक असफलता पर सवालों से बचने के लिए जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है। इसी रणनीति के तहत अब चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था को निशाना बनाया जा रहा है।
ओमप्रकाश सिन्हा ने कहा कि विपक्ष को जब जनता के बीच अपने प्रदर्शन का जवाब देना होता है, तब वह कभी चुनाव आयोग, कभी EVM और कभी अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन बिना ठोस तथ्यों के संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति अविश्वास पैदा करने का प्रयास है।
आयोग की सर्वसम्मति ने विपक्ष के दावों पर उठाए सवाल
सिन्हा ने कहा कि 26 सितंबर को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों निर्वाचन आयुक्तों की बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR सहित प्रमुख निर्णय पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र किसी चुनावी नीति अथवा SIR से संबंधित नहीं था, बल्कि प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी के प्रशासनिक कार्यप्रणाली से जुड़ा आंतरिक मामला था।
उन्होंने कहा कि जिस पत्र और रिपोर्ट को आधार बनाकर विपक्ष ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए, आयोग की सफाई के बाद उसके दावों की वास्तविकता जनता के सामने आ गई है।
SIR पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी विपक्ष के दावों के बीच महत्वपूर्ण
सिन्हा ने कहा कि SIR की वैधानिकता को लेकर भी विपक्ष को तथ्यों के साथ बात करनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 को Association for Democratic Reforms बनाम Election Commission of India मामले में बिहार में SIR की वैधता को बरकरार रखा और माना कि आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 तथा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21(3) के तहत ऐसी विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया करने का अधिकार है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मतदाता सूची की शुद्धता और पात्र मतदाताओं की भागीदारी दोनों महत्वपूर्ण हैं। इसलिए किसी भी प्रक्रिया पर राजनीतिक आरोप लगाने के बजाय तथ्यों और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर चर्चा होनी चाहिए।
“हार का ठीकरा संस्थाओं पर फोड़ना बंद करे विपक्ष”
ओमप्रकाश सिन्हा ने कहा कि “जनता जब विपक्ष को बार-बार नकारती है तो विपक्ष को आत्ममंथन करना चाहिए, न कि अपनी राजनीतिक असफलता का ठीकरा संवैधानिक संस्थाओं पर फोड़ना चाहिए।” उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की स्पष्टता के बाद विपक्ष को अपने आरोपों पर पुनर्विचार करना चाहिए और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को राजनीतिक विवादों से बचाना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया पर वास्तविक सुधार की चर्चा करना नहीं, बल्कि भ्रम और संशय का वातावरण बनाकर अपनी राजनीतिक जमीन बचाना है। उन्होंने कहा कि जनता तथ्यों को समझती है और केवल आरोपों से लोकतांत्रिक संस्थाओं पर उसका विश्वास कमजोर नहीं किया जा सकता।
पत्रकार वार्ता में नगर पालिका अध्यक्ष अरविन्द भगत, जिला मंत्री संतोष सिंह, जिला मीडिया प्रभारी फैज़ान सरवर खान, जिला कार्यालय सह प्रभारी शरद चौरसिया एवं शहर मंडल अध्यक्ष मुकेश सोनी उपस्थित रहे।

