अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रीय संयोजक ,सिक्ख यूथ &सीनियर एसोसिएशन इंडिया रजि.के अध्यक्ष एवं जबलपुर सिक्ख संगत रजि.के महासचिव दलवीर सिंह जस्सल जी द्वारा उत्तराखंड के कर्णप्रयाग क्षेत्र में सिक्ख तीर्थयात्रियों (निहंग सिंघ) और स्थानीय लोगों के बीच हुई घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को चिट्ठी भेजी। कर्णप्रयाग की घटना में पीड़ितों तीर्थ यात्रियों द्वारा आत्म रक्षार्थ कदम उठाए जाने पर एक तरफा केस दर्ज कर उन्हें जेल भेजने पर एतराज जताया।
एवं पूरे प्रकरण में पुलिस कार्यवाही पर सवाल खड़े करते कहा कि कर्णप्रयाग में स्थानीय लोगों और सिक्ख निहंग युवकों के बीच मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। जिसके आधार पर सिक्ख युवकों को दोषी मानते हुए एक तरफा कार्यवाही की गई है। जिसके कारण सिक्ख समाज में भारी रोष व्याप्त है। उन्होंने कहा कि जब कोई लड़ाई होती है तो दोनों पक्षों को पकड़ा जाता है और निष्पक्ष सुनवाई होनी चाहिए। जिस प्रकार से पुलिस ने सिक्ख युवकों को गिरफ्तार कर मारा पीटा है इसकी जितनी निंदा की जाए कम है।
कृपाण सिक्ख युवकों ने अपनी सुरक्षा में उठाई। अगर ऐसा नहीं करते तो भीड़ उन्हें जान से मार देती। दूसरे पक्ष ने पहले डंडो से वार किया उन पर कोई कार्यवाही नहीं करना पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।
जस्सल जी ने घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई किए जाने तथा हेमकुंड साहिब यात्रा पर आने वाले सिक्ख श्रद्धालुओं के संवैधानिक एवं धार्मिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की और आगे कहा कि हेमकुंड साहिब विश्वभर के करोड़ों सिक्ख श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सम्मान और धार्मिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।
चिट्ठी में आगे कहा कि हिंदू-सिक्ख भाईचारा भारत की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है और किसी भी स्थानीय विवाद को सांप्रदायिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए। यदि किसी भी पक्ष द्वारा कानून का उल्लंघन किया गया है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए थी ,न कि पीड़ित तीर्थ यात्रियों द्वारा आत्म रक्षार्थ कदम उठाने पर एक तरफा केस दर्ज किया जाना चाहिए था ।
जस्सल जी ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद-25 का उल्लेख करते हुए कहा कि सिक्ख समुदाय को कृपाण धारण करने का विशेष संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है। कृपाण सिक्ख धर्म के पांच ककारों में से एक पवित्र धार्मिक प्रतीक चिन्ह है और इसे धारण करना सिक्ख आस्था का अभिन्न अंग है। ऐसे में हेमकुंड साहिब यात्रा के दौरान कृपाण धारण करने वाले श्रद्धालुओं के धार्मिक अधिकारों का सम्मान और संरक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उत्तराखंड देवभूमि है और यहां सभी धर्मों व आस्थाओं का सम्मान किया जाता रहा है। कुछ असामाजिक तत्वों के कारण प्रदेश की सौहार्दपूर्ण छवि प्रभावित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से यात्रा मार्ग पर शांति, सद्भाव और धार्मिक सौहार्द बनाए रखने के लिए विशेष कदम उठाने की मांग की। जस्सल जी द्वारा मुख्यमंत्री को भेजी गई चिट्ठी में कर्णप्रयाग घटना की निष्पक्ष जांच, दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई, पीड़ित निहंग सिंहों की बिना शर्त रिहाई तथा हेमकुंड साहिब यात्रा के दौरान सिक्ख श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं धार्मिक अधिकारों के संरक्षण की मांग प्रमुख रूप से उठाई।
दलवीर सिंह जस्सल द्वारा उत्तराखंड के कर्णप्रयाग की घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भेजी चिट्ठी
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