Tuesday, April 14, 2026
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पत्नी को बेघर कर दूसरी महिला संग रहने लगा पति, हाईकोर्ट का सख्त रुख – भरण-पोषण देना अनिवार्य

बिलासपुर। भरण-पोषण को लेकर हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि केवल दूसरी शादी या चूड़ी प्रथा से विवाह के आरोप लगने भर से पत्नी को भरण-पोषण (गुजारा भत्ता) देने से इनकार नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने पति की याचिका को खारिज करते हुए परिवार न्यायालय के फैसले के अनुरूप गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया है।

दरअसल, जशपुर जिले में रहने वाले युवक की शादी उसी जिले की युवती के साथ 2009 में हुई थी। उनकी तीन बेटियां हैं। बेटी होने के बाद से पति-पत्नी के बीच विवाद शुरू हो गया। पति ने पत्नी को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। बाद में उसने किसी दूसरी महिला को पत्नी बनाकर रख लिया और शादीशुदा पत्नी को घर से बेदखल कर दिया।

पति द्वारा घर से निकालने के बाद परेशान महिला ने फैमिली कोर्ट में परिवाद पेश कर हिंदू विवाह अधिनियम के तहत भरण-पोषण दिलाने की मांग की। मामले की सुनवाई के बाद फैमिली कोर्ट ने पत्नी को भरण पोषण के लिए पति को आदेश दिया।

इधर फैमिली कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए पति ने हाईकोर्ट में अपील की थी।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया, उसकी पत्नी ने अपनी इच्छा से घर छोड़ा है। इसके बाद उसने बिहार में एक व्यक्ति के साथ चूड़ी प्रथा के जरिये विवाह कर लिया है इसलिए वह भरण-पोषण की हकदार नहीं है। मामले में दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा है कि केवल दूसरी शादी या चूड़ी विवाह के आरोपों के आधार पर पत्नी को भरण-पोषण के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। फैमिली कोर्ट ने सभी साक्ष्यों, दस्तावेजों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद ही भरण-पोषण देने का आदेश दिया है। लिहाजा फैमिली कोर्ट के आदेश को अवैध नहीं ठहराया जा सकता।

Ravindra Singh Bhatia
Ravindra Singh Bhatiahttps://ppnews.in
Chief Editor PPNEWS.IN. More Details 9755884666
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