Friday, April 10, 2026
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नवरात्र में डोंगरगढ़ चूल्हों पर निर्भर: गैस सिलेंडर की कमी से भोजन व्यवस्था प्रभावित, प्रशासन से ट्रस्ट को भी नहीं मिली मदद

डोंगरगढ़।चैत्र नवरात्र जैसे विशाल आयोजन के बीच कमर्शियल गैस सिलिंडरों की किल्लत ने व्यवस्थाओं की असल तस्वीर उजागर कर दी है। प्रशासन ने मां बम्लेश्वरी मंदिर ट्रस्ट को 100 सिलेंडरों की आपूर्ति की अनुमति तो दे दी, लेकिन बुधवार शाम तक ट्रस्ट को एक भी सिलेंडर नहीं मिल पाया। हालात ऐसे बन गए हैं कि ट्रस्ट को श्रद्धालुओं और कर्मचारियों के लिए चूल्हे पर ही भोजन तैयार करने की व्यवस्था करनी पड़ रही है। ट्रस्ट अध्यक्ष मनोज अग्रवाल के मुताबिक, समय पर गैस उपलब्ध होती तो व्यवस्थाएं सुचारु रहतीं, लेकिन फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है।

सिलेंडरों की आपूर्ति को लेकर अब भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। डोंगरगढ़ स्थित मंदिर में ट्रस्ट ने चूल्हों पर भोजन बनाने की तैयारी पूरी कर ली है। कठिन परिस्थितियों के बीच ट्रस्ट ने नौ दिनों के लिए सौ सिलेंडरों की मांग की थी। खाद्य विभाग का दावा है कि मंगलवार को ही समस्या सुलझा ली गई और प्रशासन ने आपूर्ति की अनुमति दे दी है, लेकिन जमीनी हकीकत में यह आदेश अब तक कागजों से बाहर नहीं निकल पाया है।

नवरात्र के दौरान मेले की विशेष व्यवस्थाओं में ट्रस्ट को लगभग 2500 कर्मचारियों और पुलिस जवानों के लिए भोजन तैयार करना होता है। पिछले चैत्र नवरात्र में यहां 10 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे थे। ऐसे में सिलेंडर न मिलने की स्थिति में इतनी बड़ी संख्या के लिए भोजन व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। इसके साथ ही पुलिस और सुरक्षा बलों की मेस के लिए भी गैस आपूर्ति पर संशय बना हुआ है। हालांकि प्रशासन की ओर से आपूर्ति में कमी नहीं होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन अब तक इसकी ठोस स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। एहतियात के तौर पर पुलिस प्रशासन ने भी चूल्हे पर भोजन बनाने की तैयारी कर ली है।

कई होटलों व रेस्टोरेंट पर अब चूल्हे पर बन रहा भोजन

इस संकट का असर सिर्फ मंदिर तक सीमित नहीं है, बल्कि डोंगरगढ़ के होटल-रेस्टोरेंट और अस्थायी दुकानों तक साफ दिखाई दे रहा है। धर्मनगरी के छोटे-बड़े कारोबारी अब गैस के बजाय जलाऊ लकड़ी के भरोसे हैं। कमर्शियल सिलिंडरों की आपूर्ति लगभग ठप है और नए निर्देशों के अनुसार होटल-रेस्टोरेंट को सिर्फ 20 प्रतिशत गैस ही मिल पाएगी, जो बढ़ती भीड़ के बीच दो दिन भी नहीं चल पा रही है। यही वजह है कि कई व्यापारियों ने लकड़ी का भंडारण शुरू कर दिया है।

मेला ग्राउंड में दुकान लगाने वाले राधे मोहन कन्नौजिया ने बताया कि गैस नहीं मिलने पर उन्हें 17 हजार रुपये में ट्रैक्टर भर लकड़ी खरीदनी पड़ी। शिवम रेस्टोरेंट सहित कई जगहों पर अब चूल्हे पर ही भोजन बनाकर परोसा जा रहा है। मेले में लगने वाली करीब दो सौ अस्थायी दुकानों के सामने भी यही स्थिति है। इनमें से अधिकतर होटल और खानपान से जुड़े व्यवसाय हैं, जिनका संचालन अब पूरी तरह चूल्हों पर निर्भर हो गया है।

कमर्शियल की जगह घरेलू सिलिंडर के उपयोग पर होगी कार्रवाई

इसके अलावा पदयात्रियों के लिए अंजोरा से डोंगरगढ़ तक लगाए जाने वाले सेवा पंडाल और विभिन्न स्थानों पर होने वाले भंडारों पर भी इस संकट का सीधा असर पड़ रहा है। हजारों लोगों के लिए भोजन तैयार करने वाली समितियां अब वैकल्पिक इंतजाम में जुटी हैं, लेकिन संसाधनों की कमी उन्हें परेशान कर रही है। कमर्शियल सिलिंडरों की आपूर्ति को लेकर लागू नई व्यवस्था के तहत व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को उनके पिछले महीने की खपत का केवल 20 प्रतिशत ही गैस मिल रही है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी होटल में पिछले महीने 20 सिलेंडरों की खपत हुई थी, तो इस बार उसे मात्र चार सिलेंडर ही दिए जाएंगे। वहीं अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान, छात्रावास, जेल और रेलवे स्टेशन जैसी आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता देते हुए बिना कटौती के आपूर्ति का प्रावधान रखा गया है, जबकि सरकारी कार्यालयों और कैंटीन को 50 प्रतिशत तक गैस उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही कमर्शियल की जगह घरेलू सिलेंडर के उपयोग पर सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं।

कमर्शियल गैस की कमी ने व्यवस्थाओं को संकट में डाला

बुधवार को दोपहर तीन बजे खाद्य विभाग की वीडियो कॉन्फ्रेंस में इस नई व्यवस्था की जानकारी दी गई और एक घंटे के भीतर एजेंसियों को निर्देश भी जारी कर दिए गए, लेकिन इसके बावजूद जमीनी स्तर पर आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। यह स्थिति प्रशासनिक दावों और वास्तविकता के बीच की खाई को साफ तौर पर दिखाती है। हालांकि खाद्य विभाग ने यह स्पष्ट किया है कि घरेलू गैस कनेक्शनों पर किसी तरह का संकट नहीं है और शहरी क्षेत्रों में 25 दिन तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन के अंतराल पर सिलेंडरों की आपूर्ति नियमित रूप से की जा रही है। इसके बावजूद डोंगरगढ़ में नवरात्र जैसे बड़े आयोजन के दौरान कमर्शियल गैस की कमी ने व्यवस्थाओं को संकट में डाल दिया है, जहां आस्था के इस महापर्व में अब धुएं से उठती चूल्हों की लपटें प्रशासनिक तैयारी की असल तस्वीर बयान कर रही है।

Ravindra Singh Bhatia
Ravindra Singh Bhatiahttps://ppnews.in
Chief Editor PPNEWS.IN. More Details 9755884666
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