Saturday, January 17, 2026
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दिल्ली में एनआरआई महिला से 30 लाख की साइबर ठगी, फर्जी दूतावास और पुलिस अधिकारी बनकर दिया वारदात को अंजाम

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की इंटर स्टेट सेल ने साइबर ठगी के एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है. ये आरोपी डिजिटल अरेस्ट और फर्जी ऑनलाइन निवेश के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी कर रहे थे. पुलिस जांच में ठगी की रकम को छिपाने के लिए कई परतों में बैंक खातों के इस्तेमाल का खुलासा हुआ है. दिल्ली पुलिस के मुताबिक दिल्ली के बैंक एन्क्लेव निवासी एक व्यक्ति को व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए मोटे मुनाफे का लालच दिया गया. पीड़ित को Cventura नाम का एक फर्जी ऐप डाउनलोड कराया गया और अलग-अलग छह बैंक खातों में करीब 31.45 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए.

बाद में व्हाट्सऐप ग्रुप गायब हो गया और ऐप भी बंद हो गया. जांच के दौरान पुलिस ने पंजाब और गुजरात में छापेमारी कर इस ठगी से जुड़े आरोपियों को पकड़ा. गुजरात के सुरेंद्रनगर निवासी अर्जुन सिंह को दूसरे स्तर के म्यूल अकाउंट के इस्तेमाल में गिरफ्तार किया गया, जिसने कमीशन के तौर पर दो लाख रुपये लिए थे.

एनआरआई महिला को बनाया अपना शिकार

दिल्ली पुलिस के मुताबिक अमेरिका से दिल्ली आई एक एनआरआई महिला को ठगों ने अपना शिकार बनाया. महिला को व्हाट्सऐप कॉल कर खुद को अमेरिकी दूतावास और फिर दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताया गया. वीडियो कॉल पर नकली पुलिस वर्दी पहनकर उसे डिजिटल अरेस्ट में रखा गया और लगातार डराया-धमकाया गया. इस दबाव में महिला से 30 लाख रुपये एक फर्जी कंपनी के खाते में ट्रांसफर करवा लिए गए. इस मामले में पंजाब के मोहाली निवासी वरुण को गिरफ्तार किया गया, जो फर्म वर्णव इन्फोटेक का पार्टनर है.

मोबाइल-लैपटॉप-कार समेत ये सामान बरामद

जांच में सामने आया कि ठगी की पूरी रकम उसके खाते में आते ही मिनटों में कई अन्य खातों में ट्रांसफर कर दी गई और बाद में अलग-अलग राज्यों से चेक के जरिए निकासी की गई. वरुण के पास से 38 एटीएम कार्ड, 51 चेकबुक, कई मोबाइल फोन, लैपटॉप, नकदी और एक स्कॉर्पियो गाड़ी बरामद की गई है.

दिल्ली पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने किया खुलासा

दिल्ली पुलिस की पूछताछ में आरोपी ने बताया कि पहले वह कॉल सेंटर चलाता था लेकिन नुकसान होने के बाद उसने पैसों के लालच में अपना बैंक खाता दूसरों को इस्तेमाल करने के लिए दे दिया. बदले में उसे मोटा कमीशन मिला. क्राइम ब्रांच के अधिकारियों के मुताबिक यह गिरोह डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश योजनाओं, नकली मोबाइल ऐप और म्यूल बैंक खातों के जरिए ठगी की रकम को इधर-उधर घुमाकर गायब कर देता था. फिलहाल पुलिस अन्य पीड़ितों की पहचान, बाकी रकम की बरामदगी और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है.

Ravindra Singh Bhatia
Ravindra Singh Bhatiahttps://ppnews.in
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