Wednesday, June 19, 2024
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प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के शिक्षाविद् सेवा प्रभाग द्वारा अम्बिकापुर में समर कैम्प उमंग 2024 का समापन, जिज्ञासा ही एक ऐसा माध्यम है, जो सदा लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये प्रेरित करता है और एक न एक दिन सफलता के शिखर पर पहुँचा देता है-भ्राता राजेश पाण्डे

अम्बिकापुर

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के शिक्षाविद् सेवा प्रभाग द्वारा नव विश्व भवन चोपड़ापारा अम्बिकापुर में छात्रों, के सर्वागींण विकास कि लिये आयोजित समर कैम्प उमंग 2024 का समापन समारोह का शुभारम्भ अतिथियों के द्वारा द्वीप प्रज्वलित कर किया गया।

इस अवसर पर बच्चों द्वारा रंगारंग कार्यक्रमों के माध्यम से भारत की प्राचीनतम् संस्कृति एवं आधुनिक सभ्यताओं की सुंदर अभिव्यक्ति किया गया एवं समर कैम्प के दौरान हुए अपने अनुभवों को बच्चों ने साझा किया।

अनसुमन एवं ग्रुप के द्वारा प्रस्तुत लुधनाटिका व्यसनमुक्ति से प्रेरणा दिया गया कि नशा व्यक्ति को पूरी तरह खत्म कर देता है इसलिये किसी भी प्रकार का नशा नहीं करना चाहिये और नशा से मुक्त होने के लिये परमात्मा की याद और मेडिटेशन बहुत आवश्यक है।

इसके पश्चात् समर कैम्प में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं और खेल स्पर्धाओं के विजेताओं को अतिथिओं द्वारा पुरूस्कृत किया गया।

जिसमें बेस्ट स्टूडेंट ऑफ समर कैंप का पुरस्कार हॉलीक्रास इंग्लिश मीडियम स्कूल से कक्षा 9 वीं का छात्र रिषभ कुशवाहा और हॉलीक्रास हिन्दी मीडियम से कक्षा 10 वीं की छात्रा कुमारी आश्विन पैकरा ने जीता। इस दौरान बच्चों ने रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत कर सभा को मंत्रमुग्ध कर दिया।


अनुशासन के बिना जीवन में कुछ भी प्राप्त नहीं हो सकता। किसी भी चीज को सीखने के लिये जीवन में जिज्ञासा होना बहुत आवश्यक है।

जिज्ञासा ही एक ऐसा माध्यम है, जो सदा लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये प्रेरित करता है और एक न एक दिन सफलता के शिखर पर पहुँचा देता है और यदि मन में जिज्ञासा उत्पन्न होता है, तो उसे मन में छिपाकर रखने के बजाये किसी न किसी से शेयर जरूर करे क्योंकि शेयर करने से परेशानी का हल होता है

उक्त विचार छात्रों के सर्वागींण विकास के लिये आयोजित समर कैम्प उमंग 2024 के समापन में मुख्य अतिथि सम्भागीय कमाण्डेड भ्राता राजेश पाण्डे जी ने बच्चों को सम्बोधित करते हुये कहा।

आगे उन्होंने बच्चों को समझाते हुये कहा कि हमें किसी से कैम्पेरिजन व कॉम्पिटीशन नहीं करना चाहिये, क्योंकि जब हम दूसरों से अपनी तुलना करते है तो स्वयं को बहुत प्रेशराइज, दुःखी और तनाव में महसूस करते है जिससे मन की शांति और एकाग्रता धीरे- धीरे खत्म होने लगती है और अपने जीवन से निराश होने लगते है। अपने मन को मेडिटेशन, ध्यान के माध्यम से सदा खुश रखें क्योंकि इससे मन चार्ज होता है और हर चीज को ग्रहण करने की शक्ति बढ़ती है।


सरगुजा संभाग की सेवाकेन्द्र संचालिका ब्रह्माकुमारी विद्या दीदी ने बच्चों को सम्बोधित करते हुये कहा कि राष्ट्र का निर्माण बच्चों से होता है। विद्यार्थी जीवन सबसे अच्छा जीवन होता हैं। यदि विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मकता आ जाये तो पूरा संसार सकारात्मक हो सकता है जिससे श्रेष्ठ संसार का निर्माण हो सकता है। परन्तु चिन्ता का विषय तो यह है कि छोटे बच्चे तनाव, डिप्रेशन जैसी समस्याओं का शिकार होते जा रहे है, जिससे इनके अन्दर की एकाग्रता, स्थिरता और दृढ़ता की शक्ति कम होती जा रहा है, जो लक्ष्य रखते है उस लक्ष्य तक पहुँच नहीं पाते है।

बच्चों के पास ऊँची- ऊँची डिग्रियों के साथ- साथ बच्चों के अन्दर आध्यात्मिकता गुण, नैतिक मूल्य, अच्छे संस्कार और सेवाभावना समाहित हो तो वो एक अच्छे इंसान बन, अपने परिवार, समाज और देश के लिये आदर्श स्थापित कर सकते है इसी लक्ष्य से विगत 15 वर्षों से यह समर कैम्प का आयोजन किया जा रहा है।

उन्होंने बच्चों के जीवन में परमात्मा के महत्व को महसूस कराते हुये कहा कि जैसे माता- पिता द्वारा शारीरिक पालना होती है, उसी प्रकार परमात्मा द्वारा आत्मा की पालना होती है। ये माता- पिता भौतिक साधन प्रदान कर सकते है, परन्तु परमात्मा से सदा कनेक्शन जोड़ने से आत्मा के अन्दर शक्ति आती है, जिससे आत्मा शक्तिशाली बनती है, आत्मा के अन्दर एकाग्रता की शक्ति, स्थिरता, निर्णय करने की शक्ति और परिस्थियों को सामना करने की शक्ति आ जाती है। इसलिये परमात्मा को हर कार्य में हर सम्बन्ध में अपना साथी बनाकर रखना चाहिये।
होम गार्ड कमाण्डेड भ्राता शिवकुमार कठौतिया जी ने बच्चों के अन्दर के सकारात्मक परिवर्तन को देख ब्रह्माकुमारीज़ संस्था की सराहना करते हुये कि इस प्रकार के आयोजन से विलुप्त संस्कृति पुर्नजागृत होगी। बच्चों को सदैव कौवे के भांति प्रयास करना चाहिये, बगुले के भांति एकाग्रचित ध्यान से हर कार्य करना चाहिये, कुत्ते की भांति नींद हो, संतुलित आहार ले और आलस्य को त्याग, फुर्तीलेपन से कार्य करे तो अर्जुन के भांति सफल रहेंगे। आगे उन्होने बच्चों से आग्रह करते हुये कहा कि रोज सुबह उठते ही माता- पिता का पैर छूना चाहिये, क्योंकि माता- पिता से जो आशीर्वाद मिलता है, वो भगवान के आशीर्वाद के सामान होता है। जो बच्चे अपने माता- पिता के सामने झूकते है, वो जीवन के किसी भी परिस्थिति के सामने नहीं झूक सकते क्योंकि ऐसे समय में उनके माता- पिता की दुआयें छत्रछाया बन जाती है।
चिराग सोशल वेलफेयर सोसायटी के निर्देशक भ्राता मंगल पाण्डेय जी ने कहा बच्चों के चारित्रिक और नैतिक विकास से ही संसार का विकास होगा। व्यक्तित्व विकास का मतलब ही है कि हमारे अन्दर शिक्षा के साथ- साथ कितने गुण है, हमारे में धैर्य रखने की क्षमता कितनी है, परखने की शक्ति कितनी है और हमारा व्यवहार सभी के साथ कैसा है? इसका आकलन ही व्यक्तित्व विकास है। बच्चों को शिक्षा ग्रहण करने केे साथ ही साथ धर्म से जुडकर धर्म के श्रेष्ठ आचरण को जीवन में धारण करना होगा तभी सम्पूर्ण विकास सम्भव है।
प्रतिमा बहन ने बताया कि सोमवार 20 मई 2024 से बच्चों एवं उनके अभिभावको के लिये तनावमुक्ति एवं खुशनुमा जीवन जीने के लिये सात दिवसीय राजयोग शिविर का आयोजन नव विश्व भवन चोपड़ापारा अम्बिकापुर में किया जा रहा है। जिसक समय सुबह 9 से 10 बजे तक एवं संध्या 5.30 से 6.30 एवं 7 से 8 बजे तक रहेगा। इनमें से किसी भी एक समय आकर इसका लाभ ले सकते है।
अंत में सभी बच्चों का उमंग समर कैम्प 2024 का उत्कृष्ठ उपस्थिति पुरूस्कार दिया गया जिससे बच्चों में खुशी, उमंग उत्साह का लहर फैल गया।
कार्यक्रम का सफल संचालन बी.के. प्रतिमा बहन और प्रीतम जायसवाल ने किया।

Ravindra Singh Bhatia
Ravindra Singh Bhatiahttps://ppnews.in
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