श्री राम वन गमन पथ के एक पड़ाव पत्थलगांव से 10 कि मी दूर माण्ड तट पर बसे किलकिलेश्वर धाम(किलकिला) का यह ड्रोन से लिया गया चित्र,
माण्ड नदी सदैव इस पावन स्थान को ओर अधिक मनोरम बनाती है,छत्तीसगढ़ की पूर्व सरकार ने राम वन गमन पथ को विकसित करने का कार्य आरंभ किया था जिससे किलकिलेश्वर धाम में भी सोन्द्रीयकरण, एवम श्रद्धालुओ की सुविधाओं का विस्तार किया जाना प्रस्तावित था, परंतु आरंभ नहीं हो पाया, श्री विष्णुदेव जी के मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने स्थानीय विधायक श्रीमती गोमती साय जी के अनुरोध पर किलकिलेश्वर धाम के अहाता, गेट, धर्मशील, शेड सहित सभी सौंदर्यीकरण की घोषणा की थी परंतु इस कार्य की प्रगति संतोषजनक नहीं है, पत्थलगांव की जीवनदायिनी मांड नदी से पत्थलगांव को पेयजल मिलता है,
आज यह बातें याद दिलाने का उद्देश्य यह है कि श्रवण मास में लाखों की संख्या में भक्त गण कांवर लेकर महादेव के दरबार पहुंचते है, ओर यहां पूर्व की घोषणा पर तो कार्य होना ही है, विधायक महोदया ने जर्जर हो चुके पत्थलगांव से किलकिल मार्ग के निर्माण की स्वीकृति दिलाकर कार्य आरंभ भी करवा दिया था परंतु उक्त कार्य अधूरा रहने से कांवर यात्रियों को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा, कांवर यात्रा के दौरान अनेक समाज सेवियों द्वारा भंडारा, सहित अनेक सेवा के कार्य इस दौरान किये जाते है, सभी कार्यों में सड़क बाधा बनती है इसी तरह सीतापुर की ओर से बहना टांगर के रास्ते आने वाले श्रद्धालुओं को भी अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है
प्रशासन को इस ओर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।

