रायपुर
ग्राम पंचायत नकटी (सम्मानपुर) के खसरा नंबर 460 की 15.4790 हेक्टेयर भूमि पर ग्रामीणों का पारंपरिक निस्तारी हक है।
प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा बिना पूर्व पुनर्वास के मकान तोड़ना और नियम विरुद्ध तरीके से इस आरक्षित भूमि को ‘विधायक कॉलोनी’ या ‘हाउसिंग बोर्ड’ को सौंपना छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 237, पुनर्वास नीति 2007 तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का खुला उल्लंघन है।
छत्तीसगढ़ राज्य सरकार ख़ुद के बनाये हुवे नियम याने कि “छत्तीसगढ़ शासन की आदर्श पुनर्वास नीति-2007” (बिंदु 6.1 से 6.9) के अनुसार, बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था, बसाहट या सर्वसुविधायुक्त भूखंड दिए बिना ग्रामीणों के घरों को तोड़ना पूरी तरह से अमानवीय और गैर-कानूनी है।लेकिन फिर भी भरे बरसात में अमानवीय चेहरा दिखाते हुवे नकटी (सम्मानपुर) के 77 घर तोड़के सैकड़ो ग्रामीणों को बेघर कर दिया गया ।
खसरा नंबर 460 (15.4790 हेक्टेयर) जो कि मिसिल बंदोबस्त और प्रारूप-2 के अनुसार मूल रूप से निस्तार, चारागाह (चरनोद) और गौठान के लिए आरक्षित भूमि है, उस पर विधायक आवासीय कालोनी के निर्माण का प्रस्ताव वैधानिक रूप से गलत है।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय के “जगपाल सिंह बनाम पंजाब राज्य (2011)” के ऐतिहासिक फैसले तथा छत्तीसगढ़ शासन, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के आधिकारिक परिपत्र (मार्च 2011) के अनुसार स्पष्ट निर्देश है कि ऐसी भूमियों का स्वरूप परिवर्तन (परिमार्जन) किसी भी स्थिति में नहीं किया जा सकता। विधायक कालोनी या अन्य प्रयोजन हेतु सरकार निर्माण नहीं कर सकती है ।
भारतीय संविधान के 73वें संशोधन और पंचायती राज अधिनियम के तहत ग्राम सभा को अपनी सीमा के भीतर जल, जंगल, जमीन और सार्वजनिक संपत्तियों के प्रबंधन का सर्वोच्च वैधानिक अधिकार है।
ग्राम पंचायत नकटी की ग्राम सभा की बैठक दिनांक (04/09/2024) में प्रस्ताव क्रमांक 13 के अंतर्गत सरपंच (श्रीमती कुमुंद टंडन), उपसरपंच (श्रीमती चमेली साहू), सभी पंचों और समस्त ग्रामीणों द्वारा सर्वसम्मति से इस अवैध आवंटन और कंक्रीट निर्माण का कड़ा विरोध किया गया है।
ग्राम सभा का यह लिखित विरोध नायब तहसीलदार और जिला प्रशासन के लिए बाध्यकारी होना चाहिए। बिना ग्राम सभा की सहमति के सार्वजनिक निस्तार की भूमि का व्यावसायिक या आवासीय उपयोग हेतु डाइवर्जन (व्यपवर्तन) करना पंचायती राज की मूल आत्मा पर आघात है नकटी (सम्मानपुर) गाँव में सर्व छत्तीसगढ़िया समाज का महापंचायत है । आजके महापंचायत में न्याय दिलाया जाएगा । न कोई राजनीतिक सरोकार न कोई स्वार्थ केवल निष्पक्ष न्याय मिलेगा।

