मनोरा। जशपुर कलेक्टर रोहित व्यास के मार्गदर्शन में जिले की शिक्षा गुणवत्ता को बढ़ाने एवं प्राथमिक कक्षाओं के छात्रों में गणितीय दक्षताओं को बढ़ाने के लिए मनोरा विकासखण्ड के समस्त 30 संकुल में संकुल स्तर पर संकुल समन्वयकों के द्वारा “जस लर्न” कार्यक्रम अंतर्गत प्राथमिक शालाओं में कार्यरत शिक्षकों को दिनाँक 25 जून 2026 को प्रशिक्षित किया गया।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के उद्देश्यों को धरातल पर उतारने और प्राथमिक स्तर के बच्चों में बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (FLN) को मजबूत करने के लिए जिला प्रशासन की अभिनव पहल “जश-लर्न” कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। कर्नाटक के सफल कनेक्टेड मॉडल पर आधारित इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कक्षा तीसरी से पांचवीं तक के विद्यार्थियों की गणितीय क्षमता को बढ़ाना और उनके मन से गणित के भय को दूर करना है।
इस कार्यक्रम के अंतर्गत स्कूल समय समाप्त होने के बाद शिक्षक मोबाइल फोन के माध्यम से विद्यार्थियों को व्यक्तिगत रूप से गणित की कोचिंग देंगे।
सीमित समूह और विशेष ध्यान: -कार्यक्रम के तहत एक ‘सर्कल टाइम’ कुल 6 सप्ताह का होगा। इस दौरान प्रत्येक शिक्षक केवल तीन-तीन विद्यार्थियों को गोद लेकर उन्हें विशेष रूप से प्रशिक्षित करेंगे।
फोन कॉल के जरिए मेंटरशिप:– शिक्षक निर्धारित समय पर सीधे छात्र या उनके अभिभावकों को फोन कॉल करेंगे। प्रत्येक कॉल लगभग 30 मिनट से लेकर एक घंटे तक की होगी, जिसमें बच्चे की सीखने की गति के अनुसार उसे व्यक्तिगत मार्गदर्शन दिया जाएगा।
बुनियादी संक्रियाओं पर जोर: -इस अनूठे प्रयास का सीधा लक्ष्य यह है कि बच्चे गणित की मूलभूत संक्रियाओं जैसे— जोड़, घटाव, गुणा और भाग को बेहद सरलता से सीख सकें और अपने दैनिक जीवन में इससे संबंधित समस्याओं को आसानी से हल कर सकें।
तकनीक के जरिए दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचेगी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा:–
अक्सर देखा जाता है कि कई छात्र उच्च कक्षाओं में पहुँचने के बाद भी गणित की मूलभूत अवधारणाओं में कमजोर रह जाते हैं। ”जश-लर्न” मिशन इसी चुनौती को दूर करने का एक प्रयास है।
मनोरा विकासखंड शिक्षा अधिकारी तरुण कुमार पटेल मनोरा संकुल के शिक्षक प्रशिक्षण में भी शामिल हुए। उन्होंने शिक्षको को प्रेरित करते हुए बताया कि “जश लर्न” कार्यक्रम से बच्चों में गणित विषय के प्रति आकर्षण उत्पन्न होंगे बच्चों के सीखने के स्तर में सुधार होगा साथ-साथ यह कार्यक्रम छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों के मध्य समन्वय भी स्थापित करेगा। डिजिटल माध्यमों और सरल तकनीक के उपयोग से दूरस्थ अंचलों के बच्चों तक भी गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सहायता प्रदान करेगी।

