Friday, February 27, 2026
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वादों की धूल में दबा गांव: NMDC Limited साइडिंग पर चार दिन से ब्रेक, स्कूल पर गिरा बोल्डर; ‘लाल पानी’ पीने को मजबूर ग्रामीण

बस्तर। तोकापाल ब्लॉक के मारेंगा में एनएमडीसी की साइडिंग पर लौह अयस्क की ढुलाई चार दिनों से ठप है। ग्रामीणों के विरोध से कंपनी को रोजाना करोड़ों के नुकसान का दावा किया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि साइडिंग की अनुमति के बदले किए गए वादे पूरे नहीं हुए। 2020 की जनसुनवाई में रोजगार और ग्राम विकास का भरोसा दिया गया था। लेकिन न युवाओं को नौकरी मिली, न सीएसआर से गांव को कोई ठोस लाभ। उल्टा साइडिंग से धूल, शोर और प्रदूषण बढ़ गया है। लौह अयस्क की धूल से सांस और त्वचा रोग बढ़ने की शिकायतें सामने आई हैं। गुरुवार को एसडीएम, तहसीलदार और एसडीओपी के साथ एनएमडीसी अफसर पहुंचे। करीब दो घंटे की चर्चा के बाद भी कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। ग्रामीणों ने साफ कहा कि मांगें पूरी होंगी, तभी ढुलाई चलेगी। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे बलराम मौर्य ने इसे गांव, रोजगार और पर्यावरण की लड़ाई बताया। ग्रामीण खेतों में दूषित पानी और आसपास बढ़ते खतरे की ओर भी इशारा कर रहे हैं। अब सवाल है क्या विकास का बोझ गांव ही उठाएगा?

परंपरा की पहरेदारी, जहां चिता भी गांव से बाहर जलती है

बस्तर। तेलीनसत्ती गांव अपनी अनोखी परंपराओं के लिए पहचाना जाता है। यहां न होलिका दहन होता है और न दशहरे पर रावण दहन। गांव में किसी की मृत्यु पर भी चिता नहीं जलाई जाती। शव को पड़ोसी गांव देमार की सीमा तक ले जाया जाता है। गांव के केंद्र में तेलीनसत्ती मंदिर स्थित है, जिसमें 12वीं शताब्दी का पाषाण है। इसे सत्ती माता के रूप में पूजा जाता है। किवदंती एक महिला के सती होने की ऐतिहासिक घटना से जुड़ी है। ग्रामीणों का मानना है कि परंपरा टूटने से गांव पर विपत्ति आती है। 2015 में यहां जय मां सती मंदिर की स्थापना की गई। आज भी महिलाएं मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश नहीं करतीं। बुजुर्ग नई पीढ़ी को परंपरा से जोड़ने का काम कर रहे हैं। 2400 की आबादी वाला यह गांव 85% साक्षर है। यहां आस्था ही नियम है और परंपरा ही कानून।

टैक्स नहीं तो संपत्ति नहीं, फरसगांव नगर पंचायत का सख्त अल्टीमेटम

कोंडागांव। नगर पंचायत फरसगांव ने बकाया कर वसूली पर सख्ती बढ़ा दी है। फरवरी के अंत तक टैक्स जमा नहीं करने वालों पर कार्रवाई तय है। बड़े बकायादारों की सूची सार्वजनिक करने का निर्णय लिया गया है। संपत्ति कर, जल कर और दुकान किराया शामिल है। धारा 164 के तहत अंतिम नोटिस जारी हो चुके हैं। मार्च से प्रकरण एसडीएम न्यायालय भेजे जाएंगे। धारा 165 के तहत चल-अचल संपत्ति की नीलामी संभव है। इस फैसले से लंबे समय से टैक्स न देने वालों में हड़कंप है। सीएमओ मयंक कुमार बसन्तवानी ने सहयोग की अपील की है। नगर पंचायत की टीम लगातार करदाताओं से संपर्क में है। प्रशासन का कहना है नियम सभी पर समान हैं। समय पर टैक्स देना जिम्मेदार नागरिक की पहचान है।

स्कूल के ऊपर गिरा बोल्डर, फिर भी बेखौफ क्रशर माफिया

दंतेवाड़ा। गीदम के एक क्रशर प्लांट में ब्लास्ट के बाद बड़ा हादसा सामने आया। उड़ता हुआ बोल्डर स्कूल की छत पर जा गिरा। मामले में ब्लास्टर और असिस्टेंट ब्लास्टर गिरफ्तार हुए। दो आरोपी अब भी फरार बताए जा रहे हैं। इधर जिले के पांच क्रशर प्लांट नियमों को खुली चुनौती दे रहे हैं। धुरली क्रशर स्टेट हाईवे के बेहद करीब संचालित हो रहा है। सिर्फ 10 मीटर दूरी पर सड़क और 200 मीटर में स्कूल-आश्रम। 100 फीट गहरी ब्लास्टिंग, लेकिन सुरक्षा इंतजाम नदारद। ब्लास्ट से पहले मुनादी तक नहीं की जाती। ग्रामीणों को सालाना सिर्फ 6 हजार मुआवजा मिलता है। धूल नियंत्रण के जरूरी उपकरण भी नहीं लगे हैं। हादसे का इंतजार क्यों कर रहा सिस्टम—यही बड़ा सवाल है।

गांव से ग्लोबल तक, धुड़मारास की पर्यटन उड़ान

बस्तर। बस्तर का धुड़मारास गांव अंतरराष्ट्रीय पहचान की ओर बढ़ रहा है। यूएन मेंटर किर्सी ह्यवैरिनेन के भ्रमण से नई संभावनाएं खुली हैं। कांगेर नाले में कयाकिंग और राफ्टिंग का तकनीकी परीक्षण हुआ। सुरक्षा, गाइड प्रशिक्षण और आपदा प्रबंधन पर जोर दिया गया। छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। विजन सत्र में होम-स्टे और हस्तशिल्प ब्रांडिंग पर चर्चा हुई। ग्रामीण युवाओं ने रोजगार को लेकर सवाल उठाए। महिलाओं ने स्वयं सहायता समूह से जुड़ने की इच्छा जताई। सतत पर्यटन और सांस्कृतिक संरक्षण को तीन स्तंभ बताया गया। डिजिटल प्रचार पर भी जोर दिया गया। संकेत साफ हैं धुड़मारास को एडवेंचर हब बनाया जाएगा। अब चुनौती है, योजनाओं को जमीन पर उतारने की।

50 साल सेवा, फिर भी संघर्ष आंगनबाड़ी सड़कों पर

सुकमा। सुकमा जिले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हड़ताल पर हैं। 1981 केंद्रों में ताले लगे हैं, योजनाएं ठप पड़ी हैं। 3600 से ज्यादा कार्यकर्ता और सहायिकाएं प्रदर्शन में शामिल हैं। तीन मांगें— शासकीय दर्जा, मानदेय वृद्धि और सुविधाएं। कार्यकर्ताओं को 4500 और सहायिकाओं को 2250 मानदेय मिलता है। 2018 के बाद से कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। मनरेगा मजदूरी से भी कम भुगतान का आरोप है। पेंशन, ग्रेच्युटी और चिकित्सा अवकाश की सुविधा नहीं। छुट्टी लेने पर मानदेय कटौती का भी आरोप। महिला-बाल विकास की रीढ़ कही जाने वाली ये महिलाएं नाराज हैं। 9 मार्च को विधानसभा घेराव की चेतावनी दी गई है। सवाल है सेवा का सम्मान कब मिलेगा?

रंगों के पर्व पर सख्ती, हुड़दंगियों पर पुलिस की नजर

जगदलपुर। होली पर्व को लेकर पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड पर है। 2 फरवरी को होलिका दहन और 4 फरवरी को रंग खेला जाएगा। माड़पाल, नानगुर और मावली माता क्षेत्र में विशेष निगरानी रहेगी। चौक-चौराहों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। सीसीटीवी से हुड़दंगियों पर पैनी नजर रखी जाएगी। नशे में वाहन चलाने वालों पर कार्रवाई तय है। तीन सवारी वाहन जब्त किए जाएंगे। मुखौटा पहन पहचान छुपाने वालों पर सख्ती होगी। डीजे पर अश्लील गानों पर प्रतिबंध रहेगा। पेट्रोलिंग वाहन लगातार गश्त करेंगे। पुलिस का संदेश साफ होली, खुशी की रहे, अराजकता की नहीं।

लाल पानी की मजबूरी, विकास पर भारी प्रदूषण

बस्तर। लौह अयस्क धुलाई के बाद निकलने वाला लाल पानी नालों में बह रहा है। न शुद्धिकरण, न उपचार सीधा गांवों तक असर। जहां कभी साफ पानी था, वहां आज बदबूदार धारा है। ग्रामीण मजबूरी में यही पानी पीने को विवश हैं। महिलाएं 1–2 किमी पैदल पानी लाने जाती हैं। कई नलकूप खराब पड़े हैं। पेट, त्वचा और सांस की बीमारियां बढ़ रही हैं। डीएमएफ फंड के उपयोग पर भी सवाल उठ रहे हैं। सड़क, स्कूल और शौचालय जैसी सुविधाएं अधूरी हैं। बुजुर्ग नालों में फिसलकर घायल हो रहे हैं। खनन से मुनाफा हो रहा है, पर गांव अंधेरे में हैं। अब सवाल है क्या विकास की कीमत स्वास्थ्य से चुकाई जाएगी?

Ravindra Singh Bhatia
Ravindra Singh Bhatiahttps://ppnews.in
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