शिक्षक संवर्ग का पदनाम बदलकर मल्टी-टास्किंग स्टाफ (MTS) रखना चाहिये !
रायपुर
शासकीय स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था को सुदृढ़ करने के नाम पर राज्य सरकार ने शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया था। लेकिन सरकार ने स्कूलों के शिक्षकों को आवारा कुत्तों की जानकारी संकलित कर ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत तथा निगम को देने का अजीबोगरीब फरमान जारी किया है ! छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष राजेश चटर्जी ने सरकार से पूछा है कि क्या स्कूलों में बच्चों को विषय ज्ञान देना अत्यावश्यक सेवा नहीं है ? क्या आवारा कुत्तों की सूचना देने का कार्य,शिक्षकों से कराने का आदेश माननीय सुप्रीम कोर्ट ने दिया है ?
फेडरेशन के कहना है कि अधिकांश स्कूलों बाउंड्रीवाल नहीं है। यदि हैं तो जीर्णोद्धार की स्थिति में है। ऐसे में शाला प्रमुख/शिक्षक आवारा कुत्तों का शाला में प्रवेश के रोकथाम हेतु प्रबंध कैसे करेंगे ?आवारा कुत्तों से क्या शिक्षकों को खतरा नहीं है ? बाउंड्रीवाल नहीं होने से असामाजिक तत्वों का जमावड़ा देर रात स्कूलों में होता है।जिसके कारण शालेय वातावरण दूषित होता है,बच्चों पर बुरा प्रभाव पड़ता है!शाला प्रमुख/शिक्षक को इसके रोकथाम के लिये जिला प्रशासन एवं जनमानस से सहयोग नहीं मिलता है।अनेक शाला भवन जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है। लेकिन शासन-प्रशासन को सूचना रहने के बावजूद प्रबंधन का अभाव है।लेकिन दुर्घटना होने पर शिक्षकों पर जिम्मेदारी तय किया जाता है।
उन्होंने बताया कि अनेक शिक्षकों की ड्यूटी SIR में बतौर बी एल ओ (बूथ लेवल अफसर) में लगाया गया है। बड़े मुश्किल से दो-तीन महीने बोर्ड/अन्य परीक्षाओं के लिए बचे हैं। पदोन्नति के फलस्वरूप अनेक शाला विषय शिक्षक विहीन होने वाले हैं। भारत में पिछला जनगणना रिपोर्ट 2011 में तैयार किया गया था। अगली जनगणना 2021 में होनी थी, लेकिन COVID-19 महामारी के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था। जोकि निकट भविष्य में संभावित है।फेडरेशन के कहना है कि विषय शिक्षक स्कूलों में अपना कार्य नहीं कर पा रहें हैं।लेकिन विभाग कमजोर परीक्षाफल के लिये संस्था प्रमुख/शिक्षकों के विरुद्ध कार्यवाही करता है।
आखिर दोषी कौन है ?

