Thursday, January 29, 2026
No menu items!
Homeछत्तीसगढ़अब बंदूक नहीं, हाथों में किताबें… अंधेरे की जगह उजाले ने ली...

अब बंदूक नहीं, हाथों में किताबें… अंधेरे की जगह उजाले ने ली जगह — ‘नियद नेल्लानार’ ने बदल दिया बस्तर का भविष्य

रायपुर। छत्तीसगढ़ का बस्तर अंचल वर्षों तक नक्सलवाद, गरीबी, भय और उपेक्षा का पर्याय बना हुआ था। घने जंगलों, दुर्गम पहाड़ियों और हिंसा की छाया में यह क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह से कटा हुआ था। गांवों में न सड़क थी न अस्पताल न शिक्षा की उचित व्यवस्था और न ही बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं। बच्चे स्कूल का सपना देखते थे, बीमार इलाज से वंचित रहते थे और गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए मीलों दूर पैदल चलकर अस्पताल पहुँचना पड़ता था। लेकिन जैसा कि कहा भी जाता है जब नेतृत्व संवेदनशील हो और सोच दूरदर्शी हो, तब असंभव भी संभव हो जाता है। बस्तर में आज जो परिवर्तन दिखाई दे रहा है वह प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सोच और इच्छाशक्ति का परिणाम है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में 15 फरवरी 2024 को शुरू की गई ‘नियद नेल्लानार (आपका आदर्श गांव)’ योजना ने बस्तर के भविष्य की दिशा ही बदल दी है।मुख्यमंत्री साय का मानना रहा है कि केवल सुरक्षा बल भेजकर या शिविर बनाकर ही शांति स्थापित नहीं की जा सकती बल्कि शांति की स्थापना के लिए शासन की योजनाएं, सुविधाएं और आत्मविश्वास का जन-जन तक पहुंचना आवश्यक है। छत्तीसगढ़ की साय सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है – “बंदूक नहीं, विकास ही हर समस्या का स्थायी समाधान है।” इसी सोच के साथ बस्तर के नक्सल प्रभावित इलाकों में एक साथ सुरक्षा, विकास और विश्वास की त्रिवेणी बहाने का प्रयास किया गया है।

327 गांवों में पहुंचा नियद नेल्लानार योजना का उजाला

सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर, दंतेवाड़ा और कांकेर – ये पांच जिले लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों के गढ़ माने जाते रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर इन क्षेत्रों में 54 नए सुरक्षा शिविरों की स्थापना की गई है। इन शिविरों के चारों ओर 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले 327 दूरस्थ गांवों को चिन्हित कर निर्णय लिया गया कि इन गांवों में शत-प्रतिशत योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। राज्य सरकार का यह निर्णय बस्तर के इतिहास में एक नया मोड़ साबित हो रहा है। मानचित्र के हाशिए में पड़े ये गाँव अब विकास के केंद्र बन रहे हैं।

फैल गई शिक्षा के क्षेत्र में नई रोशनी

बस्तर का सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह था कि वहां की नई पीढ़ी अज्ञानता और अशिक्षा के अंधेरे में जी रही थी। जहां स्कूल थे वहां शिक्षक नहीं थे और जहां शिक्षक थे वहाँ तक बच्चे नहीं पहुंच पाते थे। साय सरकार की ‘नियद नेल्लानार’ योजना के तहत शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। 31 नए प्राथमिक विद्यालयों को स्वीकृति दी गई। इन में से 13 विद्यालयों में कक्षाएं प्रारंभ हो चुकी हैं 185 नए आंगनबाड़ी केंद्र स्वीकृत किए गए। इनमें से 107 आंगनबाड़ी केंद्र पहले ही शुरू हो चुके हैं। अब बस्तर के उन गांवों में भी बच्चों की किलकारियां गूंजने लगी हैं, जहां पहले कभी केवल सन्नाटा पसरा रहता था।किताब और कॉपी लेकर स्कूल जाते बच्चे अब बस्तर के सुदूर दुर्गम क्षेत्रों में भी देखे जा सकते हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को पौष्टिक आहार, टीकाकरण और प्रारंभिक शिक्षा मिलने लगी है। माताएँ अब आश्वस्त हैं कि अब उनके बच्चों का भविष्य सुरक्षित है।

साय सरकार की ‘नियद नेल्लानार’ योजना से पहुंची जन-जन तक स्वास्थ्य सेवाएं और जीवन की सुरक्षा

पहले बस्तर में किसी बीमारी से पीड़ित व्यक्ति हर तरह से परेशान हो जाता था क्योंकि इलाज के लिए शहर जाना हर किसी के बस में नहीं था। एम्बुलेंस और डॉक्टर तो दूर की बात थी। आज राज्य की साय सरकार में स्थिति धीरे-धीरे बदल रही है।20 उप-स्वास्थ्य केंद्रों को स्वीकृति मिली, इनमें से 16 केंद्रों में सेवाएं शुरू हो चुकी हैं जिसमें गर्भवती महिलाओं की नियमित जाँच, बच्चों का समय पर टीकाकरण और ग्रामीणों को प्राथमिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध है। 46,172 लोगों को आयुष्मान कार्ड जारी किए गए हैं, जिससे अब ग्रामीणों को 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज मिल सकेगा। यह स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम है।आज बस्तर के लोग यह महसूस कर रहे हैं कि सरकार उनके जीवन की रक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

सड़क, बिजली और पानी – विकास की असली तस्वीर

किसी क्षेत्र के विकास का सबसे बड़ा पैमाना उसकी बुनियादी सुविधाएँ होती हैं। सड़क, बिजली और पानी के बिना विकास की कल्पना अधूरी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर बस्तर में बुनियादी ढाँचे का जाल बिछाया जा रहा है –173 सड़क एवं पुल निर्माण योजनाएँ बनाई गईं। 116 योजनाओं को स्वीकृति मिली और 26 कार्य पूरे हो चुके हैं। जहाँ पहले पगडंडी भी नहीं थी वहाँ अब पक्की सड़कें बन रही हैं। बच्चे साइकिल से स्कूल पहुँच रहे हैं और किसान अब अपनी उपज आसानी से बाजार तक पहुँचा पा रहे हैं। बिजली और प्रकाश की व्यवस्था के लिए –119 मोबाइल टॉवरों की योजना, जिनमें से 43 चालू हो चुके हैं। 144 हाईमास्ट लाइट्स स्वीकृत, जिनमें से 92 गाँवों में लग चुकी हैं अब बस्तर के कई गांव पहली बार रात में उजाले से जगमगा रहे हैं। जो क्षेत्र अंधेरे के लिए जाने जाते थे वही आज रोशनी से नहाई हुई हैं। पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सौर ऊर्जा आधारित पंपों की स्थापना की जा रही है जिससे दूर-दराज़ के गाँवों में भी शुद्ध जल पहुँचाना सम्भव हो पा रहा है।

पक्के मकान – सपनों का घर

नक्सल प्रभावित बस्तर में जो लोग वर्षों से कच्ची झोपड़ियों में जीवन बिताने को मजबूर थे राज्य की साय सरकार में उन्हें भी अब अपना पक्का घर मिल रहा है। 12,232 मकानों का लक्ष्य तय किया गया
5,984 परिवारों को स्वीकृति मिल चुकी है।

रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बस्तर के युवाओं को अब बंदूक नहीं रोजगार चाहिए और सरकार इस दिशा में लगातार प्रयास कर रही है –युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वनोपज की खरीदी को बढ़ावा दिया जा रहा है।स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं का सशक्तिकरण किया जा रहा है। 4,677 किसानों को किसान सम्मान निधि का लाभ दिया जा रहा है इसके साथ ही 18,983 महिलाओं को उज्ज्वला और गौ-गैस योजना के तहत गैस कनेक्शन मिला, ताकि वे धुएं से मुक्त रसोई में खाना बना सकें। इसका सीधा असर उनके स्वास्थ्य और जीवन स्तर पर दिखाई दे रहा है।

बस्तर में पहचान और अधिकार की हो रही वापसी

नियद नेल्लानार योजना के तहत लोगों को उनका नागरिक अधिकार भी दिया जा रहा है । 70,954 आधार कार्ड बनाए गए, 11,133 मतदाता पंजीकृत हुए और 46,172 लोगों को आयु प्रमाण पत्र दिया गया इससे बस्तर के लोग अब योजनाओं, चुनाव और सरकारी तंत्र में अपनी सक्रिय भागीदारी निभा पा रहे हैं। अब बस्तर की जनता केवल दर्शक नहीं, बल्कि लोकतंत्र के सहभागी बन चुके हैं।

शासन और जनता के बीच नया संबंध

सबसे बड़ी बात यह है कि ‘नियद नेल्लानार’ योजना ने सरकार और जनता के बीच की दूरी को समाप्त किया है। आज ग्रामीण स्वयं स्कूल, आंगनबाड़ी, राशन दुकान और अस्पताल की निगरानी कर रहे हैं। वे जागरूक हो रहे हैं, सवाल पूछ रहे हैं और अपने अधिकार पहचान रहे हैं। किसी भी विकास की सबसे मजबूत नींव होती है – जनभागीदारी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि सरकार की नीयत साफ हो तो सबसे कठिन क्षेत्र को भी विकास के पथ पर लाया जा सकता है। मुख्यमंत्री की बार-बार बस्तर यात्राएं, अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश और जमीनी निरीक्षण इस बात का प्रमाण हैं कि यह केवल कागज़ी योजना नहीं, बल्कि एक जीवंत आंदोलन है।

‘नियद नेल्लानार’ केवल एक सरकारी योजना नहीं है बल्कि यह बस्तर के पुनर्जन्म की कहानी है। यह योजना बताती है कि जहाँ एक समय भय का राज था, वहाँ आज विश्वास का सूरज उग रहा है। जहाँ कभी गोलियों की आवाज़ गूंजती थी, वहाँ अब बच्चों की हँसी सुनाई देती है। जहाँ कभी अंधकार था, वहाँ अब उजाले की रोशनी है।
जहाँ कभी अलगाव था, वहाँ अब अपनापन है।यह परिवर्तन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के दूरदर्शी नेतृत्व और मानवता के प्रति उनकी सच्ची प्रतिबद्धता का परिणाम है।

Ravindra Singh Bhatia
Ravindra Singh Bhatiahttps://ppnews.in
Chief Editor PPNEWS.IN. More Details 9755884666
RELATED ARTICLES
- Advertisment -spot_img

Most Popular

Would you like to receive notifications on latest updates? No Yes