Thursday, January 15, 2026
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खैरागढ़ राजपरिवार SIR विवाद में उलझा प्रशासन, दो टूक के बावजूद नोटिस जारी, शिकायत से खंडन और अब सुनवाई तक मामला पहुँचा

खैरागढ़। खैरागढ़ जिले में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर उठा विवाद अब स्पष्ट रूप से तीन चरणों में सामने आ चुका है. पहले लिखित शिकायत, फिर जिला प्रशासन का खंडन और अब तहसील स्तर पर औपचारिक सुनवाई. इस पूरे घटनाक्रम ने राजपरिवार से जुड़े पुराने विवाद को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है.

मामले की शुरुआत 30 दिसंबर 2025 को हुई, जब रानी विभा सिंह ने कलेक्टर खैरागढ़ कार्यालय में लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के दौरान दिवंगत पूर्व विधायक एवं सांसद राजा देवव्रत सिंह की वैवाहिक स्थिति को लेकर गंभीर त्रुटि की गई है. शिकायत में कहा गया कि उनकी तलाकशुदा पूर्व पत्नी पद्मा सिंह, जो वर्तमान में नितिन पंत की पत्नी हैं, उन्हें फिर से राजा देवव्रत सिंह की पत्नी के रूप में मतदाता सूची में दर्ज कर दिया गया, जबकि तलाक के बाद राजा देवव्रत सिंह का विवाह रानी विभा सिंह से हुआ था.

इस शिकायत के बाद 1 जनवरी 2026 को कार्यालय कलेक्टर खैरागढ़ की ओर से एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर SIR प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही के आरोपों को निराधार बताया गया. कलेक्टर कार्यालय ने स्पष्ट किया कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है.

विज्ञप्ति में कहा गया कि वर्ष 2003 और 2025 की मतदाता सूचियों का परस्पर मिलान कर 23 दिसंबर 2025 को प्रारंभिक सूची प्रकाशित की गई है, और उसी आधार पर एकीकृत मतदाता सूची तैयार की गई है. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि किसी प्रविष्टि पर आपत्ति है, तो निर्वाचन आयोग द्वारा तय समयसीमा 23 दिसंबर 2025 से 22 जनवरी 2026 के बीच निर्धारित प्रारूप और दस्तावेजी साक्ष्य के साथ दावा-आपत्ति प्रस्तुत की जा सकती है, जिसके बाद निर्वाचन नियम 1960 के तहत कार्रवाई होगी.

हालांकि, कलेक्टर कार्यालय द्वारा आरोपों का खंडन किए जाने के बावजूद मामला यहीं नहीं थमा. 5 जनवरी 2026 को तहसीलदार छुईखदान ने इस प्रकरण में नोटिस जारी करते हुए दोनों पक्षों को 14 जनवरी 2026 को समस्त दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने के निर्देश दिए. इससे यह स्पष्ट हो गया कि प्रशासनिक स्तर पर अब मामले की औपचारिक सुनवाई की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर खैरागढ़ राजपरिवार से जुड़ा पुराना विवाद सतह पर ला दिया है. राजा देवव्रत सिंह के निधन के बाद से ही उनकी पत्नी रानी विभा सिंह और पूर्व पत्नी पद्मा सिंह के बीच दस्तावेजों और अधिकारों को लेकर मतभेद सामने आते रहे हैं. अब मतदाता सूची में हुई इस कथित त्रुटि ने उस विवाद को प्रशासनिक और चुनावी प्रक्रिया से जोड़ दिया है.

फिलहाल, प्रशासन का रुख यह है कि SIR प्रक्रिया भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप और पारदर्शी ढंग से की जा रही है. वहीं, तहसील स्तर पर जारी नोटिस के बाद सबकी नजरें 14 जनवरी की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर तय होगा कि यह मामला केवल आपत्ति प्रक्रिया का हिस्सा है या वास्तव में किसी स्तर पर गंभीर चूक हुई है.

Ravindra Singh Bhatia
Ravindra Singh Bhatiahttps://ppnews.in
Chief Editor PPNEWS.IN. More Details 9755884666
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