मनोरा

मनोरा। छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशानुसार विकासखंड मनोरा में दिनाँक 27 जून 2026 को खंड स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव विधायक जशपुर माननीय रायमुनी भगत के मुख्य अतिथि में हर्सोल्लास पूर्वक मनाया गया। इसी क्रम में आज विकासखंड मुख्यालय में स्थित जनपद प्राथमिक शाला मनोरा के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर शाला स्थापना के शताब्दी समारोह का आयोजन भी किया गया जिसमें उक्त विद्यालय से अध्ययन कर चुके सेवानिवृत्त एवं वर्तमान सेवारत कर्मचारियों को प्रधान पाठक बेंजामिन एक्का के द्वारा आमंत्रित किया गया जिन्हें विधायक महोदय के कर कमलों से साल श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। शताब्दी समारोह के पश्चात पीएमश्री स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी-हिंदी माध्यम विद्यालय मनोरा के सभागार में विकासखंड स्तरीय शाला प्रवेश उत्सव कार्यक्रम के तहत कक्षा 1 ली के 05, 6 वी के 05 एवं कक्षा 9 वी के 05 नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं को तिलक लगाकर,मिष्ठान खिलाकर सम्मानित किया गया। नवप्रवेशियों को पाठ्य पुस्तक, गणवेश वितरण के साथ- साथ कक्षा नौवीं में प्रवेश लेने वाले नवप्रवेशी छात्राओं को सरस्वती साइकिल योजना अंतर्गत साइकिल का वितरण किया गया। प्रवेश उत्सव को यादगार बनाने के लिए शिक्षिका मंजुला झा के द्वारा सभी नव प्रवेशी छात्रों के हथेलियां की निशान सफेद कपडे पर ली गई उपस्थित जनप्रतिनिधि यों ने उस कपडे पर अपने हस्ताक्षर भी किए। कार्यक्रम में हैप्पी कमल कुजूर जनपद उपाध्यक्ष, जनपद सदस्य-रंजीत भगत, पूर्व जनपद सदस्य एवं एसएमडीसी अध्यक्ष सुषमा सिंह, मंडल महामंत्री रामदास यादव, भजुनन्दन नायक, आशुतोष राय के अतिरिक्त अन्य गणमान्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। विधायक जशपुर रायमुनि भगत ने सभा को संबोधित करते हुए कहा शिक्षा ही जीवन का आधार है शिक्षा से मनुष्य का सर्वागीण विकास होता है अतः सभी अभिभावक अपने बच्चों का नामांकन अपने पास के विद्यालय में अवश्य कराये। विकासखंड शिक्षा अधिकारी तरुण कुमार पटेल ने स्वागत उदबोधन में कार्यक्रम की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए शत प्रतिशत बच्चों का नामांकन व बच्चों का शाला में स्थायित्व बनाने पर सभी का ध्यान केंद्रित किया। कार्यक्रम का सफल संचालन आशुतोष शर्मा बीआरसी मनोरा के द्वारा किया गया। कार्यक्रम को व्यवस्थित करने में एबीईओ जगतपाल, सेजेस मनोरा के प्राचार्य, मनोज सिंह मंडल संयोजक, प्रधान पाठक प्रवीण कुमार पाठक, अधीक्षक विनोद भगत, विपिन विकास खरे पी ओ उल्लास, सीएसी प्रेमलाल बर्मन एवं समस्त संकुल प्राचार्य,संकुल समन्वयकों, कार्यालयीन कर्मचारियों/संस्था के शिक्षकों का सहयोग रहा।

