~ हिंदी दिवस पर विशेष ~  आलेख-नीतू श्रीवास्तव दुर्ग

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 हिंदी दिवस पर विशेष 

आलेख-नीतू श्रीवास्तव दुर्ग

 

हिंदी दिवस के अवसर पर आप सभी को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं।
विविधता में एकता पर आधारित हमारी महान भारतीय संस्कृति विभिन्न भाषाओं और बोलियों के एक सुन्दर बगीचे की तरह है, जिसमें प्रत्येक भाषा और प्रत्येक बोली का अपना महत्व है। भारत की सभी भाषाओं और बोलियों का अपना समृद्ध इतिहास और गौरवशाली साहित्य है।

इन सबके बीच देश में व्यापक रूप से प्रचलित राष्ट्र भाषा हिन्दी वास्तव में राष्ट्रीय एकता की भाषा है।

मेरा मानना है की सरकारी दफ्तरों, निजी तथा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, व्यावसायिक तथा औद्योगिक प्रतिष्ठानों के काम-काज में हिन्दी का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल होना चाहिए।
हिंदी दिवस के अवसर पर मैं आप सभी देशवासियो से हिन्दी भाषा को और अधिक समृद्ध बनाने के लिए हर क्षेत्र में अधिकतम प्रयास करने की अपील करती हूँ..!!

जिस तरह सभी देशों में अपनी मात्र भाषा को सम्मान दिया जाता है।

वैसे ही हिंदी भाषा की भी हिन्दीस्तीनी सम्मान दिया जाए।

विदेशी कल्चर को 1 सीमा तक ही अपनाए।इंग्लिश भाषा का उपयोग जरूर करे,पर जिन्हें वो भाषा नही आती है उनका सीखने में मदद करे,न कि उसको नीचा दिखाने की कोशिश ,उस कल्चर की वजह से अपने देश के संस्कारों की आहुति न दे।

क्युकी जब तक आप अपने देश का सम्मन नही करेगे तब तक दूसरे देश के लोग आप के देश को दबाने की ओर आप के देश को हथियाने की कोसिस जरूर करेगे।

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चीन,जापान ,अमेरिका ,दुबई सभी अपने देश की भाषा का उयोग करते है,अपने द्वारा बनाये गए सभी सामान में चीन में चीनी जापान में जापानीज भाषा का उपयोग करते है,जबकि भारत सिर्फ अकेला रक देश है जो अपने द्वारा बनाये गए सामान में made in India लिख कर विक्रय करते है।
हालही में पतंजलि ही एक ऐसा है उद्योग है हिंदी का प्रयोग करती है,लेकिन बगल में अंग्रेजी भाषा का प्रयोग करने से वो भी नही चुकी,
खैर कुछ भी हो भारत देश ही नही भारत माता भी है,हमे अपने माता का गौरव बनाये रखने के लिए सुगम प्रयास करते रहना चाहिए।

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फुट डालो राजनीति करो कि कोसिस भी की जाएगी

नीतू श्रीवास्तव

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