किस दिव्यांग महिला को बनाया गया दिव्यांग आइकॉन ? जानिए पूरी स्टोरी पढ़िए pp news

*ललिता पैंकरा बनी स्वीप प्लान की दिव्यांग आइकॉन

* दिव्यांग कु. ललिता पैंकरा हैं आत्मनिर्भरता की मिशाल

जशपुरनगर:- जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर डॉ प्रियंका शुक्ला ने स्वीप प्लान का दिव्यांग आइकॉन कु. ललिता पैंकरा बनाया है।
निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार जशपुर जिले में यश-प्रण अन्तर्गत स्वीप प्लान (मतदाता जागरूकता अभियान) चलाया जा रहा है । दोनो पैरों से अस्थि बाधित होने के बावजूद भी अपने क्षेत्र में मतदान जागरूकता के लिये बढ़ चढ़ कर कार्य किया है और लोगों को शतप्रतिशत मतदान हेतु प्रेरित करने का काम किया है। जिसके कारण स्वीप प्लान का दिव्यांग आइकॉन बनाया है।

क्योँ बनी दिव्यांग आइकॉन:

जिले पत्थलगांव विकास खण्ड अंतर्गत ग्राम पंचायत कुड़केलखजरी की दिव्यांग कुमारी ललिता पैंकरा ने दोनो पैरों से अस्थि बाधित होने के बावजूद आत्म निर्भरता की एक नई मिशाल पेश की है। ललिता ने न केवल खुद आत्मनिर्भर बनाया बल्कि सफलता की ऊंचाईयों को भी छूआ है। ललिता के संघर्ष एवं उसके हौसलों की जानकारी जब मुख्यमंत्री डॉं. रमन सिंह को हुई तब उन्होने लोक सुराज अभियान समाधान शिविर 14 मार्च 2018 को खरकट्टा (पत्थलगांव) में पहुंचकर ललिता से मुलाकात की तथा उसके हौसलों की प्रशंसा करते हुए उसके साथ दोपहर का भोजन भी ग्रहण किया। मतदाता जागरूकता अभियान अंतर्गत जशपुर में भी दिव्यांग मतदाताओं को जागरूक करने में इन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है जिसकी वजह से दिव्यांग आइकॉन बनाई गईं है।

दिव्यांग आइकॉन ललिता की कहानी

ललिता का बचपन अत्यन्त गरीबी में गुजरा, 16 वर्ष की अल्पायु में एक दुर्घटना में पेड़ से गिरने के कारण ललिता के कमर के नीचे का भाग लकवाग्रस्त हो गया। जिससे उसके चलने-फिरने में एक बड़ी बाधा खड़ी हो गई। इन्ही परेशानियां के चलते ललिता ने आठवीं कक्षा की पढ़ाई के बाद स्कूल जाना छोड़ दिया। एक तो गरीबी उपर से दिव्यांगता- दोनो ही चुनौतियों का ललिता ने साहसपूर्ण ढंग से सामना किया। निर्धनता के कारण घर के सभी लोग कृषि कार्य के लिए चले जाते थे, तब ललिता घर में ही रहकर पालतू पशुओं की देखभाल एवं रसोई का कार्य करतीं।

क्या कहती हैं ललिता:-

ललिता बताती हैं कि एक बार ग्राम पंचायत में आयोजित ग्राम सभा में दिव्यांगजनों के लिए समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी दी जा रही थी, तभी ललिता ने इन जानकारियों के आधार पर दिव्यांगजनों के लिए सहायतार्थ योजनाओं से लाभ पाने के लिए जनपद पंचायत पत्थलगांव से सम्पर्क किया। समाज कल्याण विभाग द्वारा ललिता की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए उसे छ.ग.निःशक्तजन वित्त एवं विकास निगम द्वारा संचालित ऋण सहायता संबंधी योजना एवं सामाजिक सहायता कार्यक्रम अंतर्गत पेंशन की जानकारी विस्तार से दी गई। विभागीय योजनाओं की जानकारी एवं सुनहरे भविष्य की आस में ललिता के सामने एक नई रोशनी उत्पन्न कर दी।समाज कल्याण विभाग द्वारा ललिता को स्व-रोजगार हेतु मार्गदर्शन देने के उपरान्त वर्ष 2012 में किराना दुकान के लिए 5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर पर 71,250 रुपए का ऋण प्रदान किया गया। जिससे ललिता ने गांव में एक किराना दुकान का संचालन प्रारंभ किया। हंसमुख एवं मिलनसार ललिता के व्यवहार एवं ग्राम वासियों के संवेदनशीलता के चलते ललिता की किराना दुकान चल पड़ी। ललिता प्रतिमाह 4 से 6 हजार रुपये आमदनी प्राप्त करने लगी। प्राप्त आय से ललिता ने नियमित रुप से मासिक किश्त की अदायगी कर पूरा ऋण राशि का चुकता कर दिया।
आत्म विश्वास से परिपूर्ण ललिता यहीं नहीं रुकी विभागीय योजना के प्रति उसका विश्वास और प्रबल हो उठा। उसने पुनः 2015 में समाज कल्याण विभाग से कृषि एवं परिवहन कार्य के लिए टेªक्टर एवं ट्रॉली के लिए आवेदन किया जिस पर विभाग ने राशि 4,50,000 रुपये का ऋण प्रदाय किया। अब ललिता किराना दुकान के संचालन के साथ-साथ अपने भाई के सहयोग से कृषि एवं परिवहन कार्य मे टेªक्टर एवं ट्रॉली के उपयोग द्वारा सम्मानजनक आय अर्जित करने लगी। इन सफलताओं को देखकर ललिता के परिवार एवं ग्रामवासियों में ललिता का मान-सम्मान बढ़ने लगा। लोग ललिता के हौसले की भूरी-भूरी प्रशंसा करने लगे। ललिता तो जैसे बनी ही थी सफलता के एक नई मिसाल कायम करने के लिए। किराना दुकान का संचालन, टेªक्टर से कृषि परिवहन कार्य करते हुए ललिता ने कुछ अलग करने की भी सोची। समाज कल्याण विभाग द्वारा ललिता की इस सोच का सम्मान करते हुए उसे मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक टेªड में संचालित LEDबल्व निर्माण के प्रशिक्षण की जानकारी दी गई।
ललिता ने तुरन्त सहमति प्रदान की एवं जिला मुख्यालय जशपुर स्थित जिला परियोजना लाईवलीहुड कॉलेज में LEDबल्व निर्माण का सफलता पूर्वक प्रशिक्षण प्राप्त किया। LEDबल्व की चमक के साथ-साथ ललिता के जीवन में भी नई रोशनी का आगाज हुआ। ललिता जल्दी ही LEDबल्व बनाने में निपुण हो गई। ललिता को नई दिल्ली स्थित व्यापार मेला में अपने कौशल प्रदर्शित करने का अवसर मिला।आज ललिता अपने क्षेत्र भर में महिलाओं विशेषकर दिव्यांगजनों के लिए एक नई प्रेरणा है।
छ.ग.निःशक्तजन विकास निगम से सहायता प्राप्त कर ललिता ने अपने जीवन को एक नई ऊँचाई पर स्थापित कर लिया। गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन वाली ललिता के पास स्वयं का पक्का घर नहीं था, प्रधानमंत्री जी की लोकप्रिय योजना प्रधानमंत्री आवास योजना में ललिता का नाम शामिल होने से अब यह कमी भी पूरी हो गई। ललिता को जिला पंचायत जशपुर द्वारा नए आवास के लिए राशि स्वीकृत की गई। ललिता ने अपने कमाए हुए पैसों में से 75,000 अतिरिक्त लगाकर अपने आवास को बड़ा और सुन्दर बना लिया। ललिता को घर से दुकान, पंचायत और आस-पास जाने के लिए हस्त चलित ट्रायसायकल प्रदान की गई थी। इस ट्रायसायकल के कारण कभी-कभी समय और श्रम शक्ति का ह्रास होता था। ललिता की इन्ही परेशानियों को दृष्टिगत रखकर जिला मुख्यालय में आयोजित सामथ्र्य मेले में केन्द्रीय इस्पात राज्य मंत्री श्री विष्णुदेव साय जी के कर कमलों द्वारा मोटराईज्ड ट्रायसायकल प्रदान की गई। मोटराईज्ड ट्रायसायकल पाकर ललिता के हौसलों को एक नई गति मिल गई।
ललिता ने निर्धनता एवं दिव्यांगता को पीछे छोड़ सफलता का एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। ललिता मुस्कराते हुए कहती है कि आदमी तन से दिव्यांग हो सकता है, मन से नहीं। मान लो तो हार है, ठान लो तो जीत है। ललिता ने अपने संघर्ष में सहभागी रहे तथा सफलता के इस मुकाम तक पहुंचाने में सहयोग के लिए जिला प्रशासन विभाग का किया है।

 

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