जशपुर जिले की जन्नत बचाने मंथन -पर्यावरण हो संतुलित ,जलवायु रहे अनुकूलित ,समाजसेवियों एवम विभागीय अधिकारियों ने किया मंथन

जशपुर :-

पर्यावरण सुरक्षा सम्मेलन में लिये गये कई अहम निर्णय :

पर्यावरण हो संतुलित ,जलवायु रहे अनुकूलित ,समाजसेवियों एवम विभागीय अधिकारियों ने किया मंथन

,तैयार की आगामी रोल प्लान

:जशपुर जिले को जन्नत ने सुंदरता की असीम सौगातें दी है समुद्र तल से 2528 फीट की ऊँचाई पर बसे जिले का सौंदर्य इन दिनों खतरे पर है

,प्रकृति की रक्षा कर ही यहाँ की खूबसूरती को फिर से सँवारा जा सकता है ,इस आशय को बढ़ावा देने जिले में पर्यावरण एवम जलवायु सरन्क्षण की दिशा में कार्य कर रहे क्रांतिकारी युवा संगठन एवम जशपुर वन मंडल के विभागीय अधिकारियों की एक सयुंक्त बैठक कांसाबेल के मंगल भवन में शुक्रवार को रखी गयी ,

पर्यावरण एवम प्रकृति की रक्षा से जुड़े इस बैठक में न केवल वर्तमान परिस्थिति में जशपुर के जल ,जंगल ,ज़मीन एवम जलवायु परिवर्तन से जुड़े गम्भीर विषयों पर मंथन हुआ अपितु भविष्य की कार्ययोजना भी तैयार की गयी ,

रिसर्च स्कालर एस पी यादव ने बताया कि जशपुर जिले में सघन वनों की अधिकता एवम जलवायु के अनूकूल परिस्थितियाँ है ,जिसके कारण यहाँ वर्षा काफी अच्छी होती है ,

कई प्राकृतिक वनस्पतियाँ यहाँ मौसम में अनुकूल क्षेत्रों में देखे जा सकते है,लेकिन आज आधुनिकता की इस अंधी दौड़ में मानव प्रकृति से इस कदर नाता तोड़ने में लग गया है जैसे मानो वह स्वामी बन बैठा हो ।

,जागरूकता के साथ -साथ हर दृष्टि से यहाँ के परिदृश्यों की रक्षा काफी अहम है ,

जशपुर जिला आने वाले समय में पूरे राज्य में एक अच्छी पहचान बना सके इस हेतु इस बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये।

बैठक में काँसाबेल वन मंडल के विभागीय प्रमुख अशोक सिंह ,सतीश वनपाल ,कांसाबेल वनमंडल अन्तर्गत समस्त वन रक्षक , फायर वाचर ,वन प्रबंधन समिति के अध्यक्ष ,आम नागरिक सहित कई समर्पित युवा उपस्थित थे ।

ये हुये निर्णय –

01-जशपुर जिले के सभी महत्पूर्ण पर्यटन केन्द्रों तक बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध हो ,जिससे पर्यटन को बधावा मिले ,विदित हो शासन को सबसे ज्यादा राजस्व आय पर्यटन विभाग से ही होता है ।

02-जिले के महत्वपूर्ण जीवन दायिनी नदियों की रक्षा ,नदियों के तट पर पौधा रोपण कर जलवायु एवम वनस्पति जलावरण क्षमता को बढ़ाया जा सके ।

03 टीमवर्क में आम नागरिकों के बीच जागरूकता उत्पन्न कर वनों के अति दोहन को रोकने ,प्राकृतिक एवम मानव जनित घटनाओं पर रोक लगाना ।

04-वन क्षेत्रों के समीप अवैध रूप से संचालित हो रहे ईंट उद्योगों का अन्यत्र विस्थापन ,जिससे प्रदूषण को रोका जा सके।

05-ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों का उपयोग ईंधन के रूप में हो ,इसके लिये छात्रावासों में जागरूकता अभियान ।

06 वनों की सुरक्षा सम्बन्धी एवं किसी भी अप्रिय घटना जो वनों से जुड़ी हो ,इसके लिये विभाग ने हेल्प लाइन नंबर जारी करने का आश्वासन दिया,वर्तमान में आग की घटनाओं पर नियंत्रण के लिये सेटेलाइट मॉनीटरिंग की आवश्यकता पर जोर दिया गया ।

07 जलवायु परिवर्तन एवम जल संकट को देखते हुये इनके सरन्क्षण की आवश्यकता पर चर्चा हुयी एवम जनजागृति अभियान पर जोर दिया गया ।

08लघु वृत मेप्स तैयार कर जनजागरण माध्यमों एवम सोशल मीडीया के जरिये जागरूकता अभियान चलाने पर बल दिया गया ।

09 प्राकृतिक संसाधनों के विवेक पूर्ण उपयोग के लिये जागरूकता अभियान ,क्योंकि इन्ही से जीवन की विषमताओं का समाधान मिलता है ।

10 जैव विविधता पृथ्वीवासियों की साझी विरासत है ,जिसे बचाना विश्व समुदाय का सामूहिक दायित्व है ,पर्यावरणीय ह्रास के कारण जैव -विविधता का क्षय हुआ है ,वनस्पतियों एवम वन्य जीवों की अनेक प्रजातियाँ लुप्त हो गयी हैं तथा कई संकटग्रस्त हैं ।

Follow me in social media

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *