छत्तीसगढ़ में सहकारिता के पुरोधा,स्वतंत्रता सेनानी,रायपुर जिला कांग्रेस के अध्यक्ष,पत्रकार स्व.वामनराव लाखे जी की जयंती पर नमन एवं स्मरणनांजलि

लेख संकलन-रविन्द्र सिंह भाटिया उपाध्यक्ष छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी संघ रायपुर

रायपुर-छत्तीसगढ़ सहकारिता के पुरोधा,स्वतंत्रता आंदोलन के सिपाही,रायपुर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष, स्वर्गीय वामनराव लाखे जी की जयंती पर शत शत नमन,

राष्ट्रीय आवास संघ के अध्यक्ष एवम रायपुर विधायक श्री सत्यनारायण शर्मा द्वारा स्व वामनराव लाखे जी की जयंती पर उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की

प्रसिद्धि स्वतंत्रता सेनानी,वामन राव लाखे जी ने रायपुर में ‘ए.वी.एम. स्कूल’ की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिसे बाद में इनकी मृत्यु के पश्चात् नाम बदलकर ‘श्री वामनराव लाखे उच्चतर माध्यमिक शाला’ कर दिया गया।
1922 में वामनराव लाखे ‘रायपुर ज़िला कांग्रेस’ के अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे। इसी समय में उन्होंने नियमित खादी वस्त्र पहनने तथा विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार का संकल्प लिया।
वामनराव बलिराम लाखे जी का जन्म- 17 सितम्बर, 1872, रायपुर, छत्तीसगढ़; भारत की आज़ादी के लिए संघर्ष करने वाले छत्तीसगढ़ राज्य के स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे। 1913 में लाखे जी ने अपना कार्य क्षेत्र सहकारी आंदोलन को बनाया था, जिससे वे जीवन पर्यन्त जुड़े रहे। सहकारिता आंदोलन के द्वारा दु:खी और शोषित किसानों की सेवा तथा सहयोग करना उनका प्रमुख उद्देश्य था। सन 1915 में रायपुर में ‘होमरूल लीग’ की स्थापना की गई थी। वामनराव बलिराम लाखे जी उसके संस्थापक थे। छत्तीसगढ़ में शुरू में जो राजनीतिक चेतना फैली, उसमें लाखे जी का बहुत बड़ा योगदान था। उन्होंने अपना सारा जीवन राष्ट्रीय आन्दोलन और सहकारी संगठन में बिताया।जन्म
वामनराव बलिराम लाखे का जन्म 17 सितम्बर, 1872 को रायपुर, छत्तीसगढ़ में हुआ था। उनके पिता पण्डित बलीराव गोविंदराव लाखे ग़रीब व्यक्ति थे, किन्तु कठोर परिश्रम से उन्होंने कई ग्राम ख़रीद लिये थे। जब वामनराव बलिराम लाखे का जन्म हुआ, उस समय तक उनके परिवार की गणना समृद्ध घरानों में होने लगी थी।शिक्षा
वामनराव बलिराम लाखे ने रायपुर से मैट्रिक उत्तीर्ण किया। माधवराव सप्रे भी उस समय उसी स्कूल में पढ़ते थे। दोनों में दोस्ती हो गई। सन 1900 में जब माधवराव सप्रे ने ‘छत्तीसगढ़ मित्र’ नाम से मासिक पत्रिका का प्रकाशन किया तो लाखे जी उस पत्रिका के प्रकाशक थे। छत्तीसगढ़ की यह पहली पत्रिका थी। सिर्फ तीन साल तक यह पत्रिका चली, पर उन तीन सालों के भीतर ही उस पत्रिका के माध्यम से राष्ट्रीय जागरण का युग आरम्भ हो गया था।राज्य सहकारी संघ के अध्यक्ष श्री झुनमुन गुप्ता एवम उपाध्यक्ष श्री रविन्द्र भाटिया ने स्व वामन राव लाखे जी की जयंती पर नमन किया

Follow me in social media

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *