चार शाहीबजादो की शहादत पर सिख समाज एवम नगरवासियों ने शहीदों को याद किया।

पत्थलगाव-धर्म की रक्षा,मुगलों के अत्याचार,के विरूद्ध लड़ते लड़ते श्री गुरु गोबिंद सिंह साहिब जी ने अपने परिवार को बलिदान कर दिया।,पिता गुरुतेग बहादुर जी को जब कश्मीरी ब्राह्मणों ने आकर बिनती की कि मुगल शासक जबरिया उनके जनेऊ काट कर उन्हें इस्लाम कबूल करवाने हेतु अत्याचार कर रहे है,तो गुरु तेगबहादुर जी ने मुगलों के खिलाफ बड़ी कुर्बानी देनी होगी कहा।वहाँ बाल रूप बैठे गोबिन्द राय जी (गुरु गोबिंद सिंह जी का बचपन का नाम) ने अपने पिता को बहुत ही सहज भाव से कहा पिता जी बड़ी कुर्बानी की जरूरत है तो ये कुर्बानी आप देओ आप से बड़ी कुर्बानी ओर कौन दे सकता है,बालक गोबिंद राय के कहने पर गुरु तेगबहादुर जी ने मुगलों के खिलाफ आवाज बुलंद कर दी और सब को हुक्म दिया कि अब मुगल हुक्मरानों को कहो कि पहले गुरु तेगबहादुर जी को इस्लाम कबूल कराओ तो हम सब भी इस्लाम कबूल कर लेंगे,इसके बाद मुगलो ने अपने अत्याचार बढ़ाते हुए गुरु तेगबहादुर जी को डिगाने के प्रयास आरम्भ कर दिए।मुगलो के साथ अनेक युद्ध हुए अन्ततः दिल्ली में शीशगंज में गुरु तेगबहादुर जी की शहादत हुई।

मोर्चा श्री गुरुगोबिंद सिंह साहिब ने संभाल लिया,खालसा पंथ की सृजना की फौज तैयार की ओर धर्म की रक्षा के लिए मैदान में कूद गए।युद्ध के दौरान अपने हाथों अपने बच्चों को सजाकर जंग में भेजा, जहाँ 2 बड़े साहिबजादे शाहिद हो गए।दूसरी ओर मुगल सैनिको ने माता गुजरी जी को एवम 2 छोटे साहबजादों को कैद कर ठंडे बुर्ज में डाल दिया और इस्लाम कबूल करने हेतु यातनाये दी जाने लगी,5 ओर 7 साल की उम्र के दोनों शाहीबजादो ने जब हथियार न डाले इस्लाम कबूल नही किया तो उन्हें दीवारों में चिनवा देने का हुक्म दिया गया,दोनो साहिब जादे जब दीवार में चीन कर भी प्राण न त्यागे ओर दीवाल गिर गयी तो हुक्मरानों ने जल्लाद को हुक्म दिया कि दोनों की गर्दन काट कर मार डाला जाए,उधर ठंडे बुर्ज में कैद करने से माता गुजरी जी ने भी अपने प्राण त्याग दिए।

मैदान में शाहीबजादो के शहीद होने की खबर गुरु गोबिंद सिंह को दी गयी तो उन्होंने कोई शोक न कर जोरदार जयकारा बोला और कहा कि

4 मुये तो क्या भया-जीवत कई हजार ।

और धर्म की रक्षा करते करते अपने प्राण त्यागने से पूर्व श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को गुरु गद्दी सजाया।ओर समूचे खालसा पंथ को हुक्म दिया आज के बाद समूह खालसा देहधारी गुरु को नही बल्कि शब्द गुरु श्री गुरु ग्रंथ साहिब को अपना गुरु मानकर उनके हुक्म पर चलेगा।उक्त इतिहास पर श्री गुरुद्वारा साहिब पत्थलगाव के ज्ञानी तिर्लोचन सिंह जी ने प्रकाश डाला

शहीदी के इस सप्ताह पर श्री दरबार साहिब पत्थलगाव में 22 दिसम्बर से 27 दिसम्बर तक अनेक कार्यक्रम आयोजित किये गए तथा 28 दिसम्बर को सन्ध्या नगर कीर्तन करते हुए नगर वासियो के साथ जय स्तम्भ पर प्रणाम शहीदां नू कार्यक्रम आयोजित कर नमन किया गया।

इस अवसर पर बोलते हुए श्री गुरु सिंह सभा के प्रधान सरदार रविन्द्र सिंह भाटिया ने कहा दुनिया के इतिहास में 5 साल की उम्र में कोई शाहिद नही हुआ औरदुनिया के इतिहास में धर्म की रक्षा के लिए 7 लोगो के शहीद होने के दूसरा कोइ प्रमाण नही है।श्री भाटिया ने कहा कि भारत वासियों का दुर्भाग्य है कि 1857 के बाद के इतिहास को तो प्रमुखता दी गयी पर 1500 से 1800 के बीच सिर्फ राजकाज का इतिहास ही किताबो में दर्ज है।आजादी के बाद इतिहास संजोने में इतिहास कारो ने इतिहास को दर्ज करने में बहुत बड़ी भूल की है।

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