गोधन न्याय योजना के तहत किसानों और पशुपालकों के लिये गठित मंत्रिमण्डलीय उप समिति की हुई बैठक गोबर की खरीदी दर की हुई अनुशंसा-किसानों एवम पशुपालकों से डेढ़ रु किलो गोबर खरीदा जाएगा

गोधन न्याय योजना के तहत किसानों और पशुपालकों से डेढ़ रूपए की किलो की दर से गोबर की खरीदी किए जाने की अनुशंसा गठित मंत्रिमण्डलीय उप समिति ने की है।

मंत्रिमण्डलीय उप समिति की बैठक आज बीज भवन में आयोजित हुई। बैठक में वन मंत्री मोहम्मद अकबर, सहकारिता मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया शामिल हुए।
छत्तीसगढ़ राज्य में गोधन के संरक्षण एवं सवंर्धन, वर्मी कम्पोस्ट के उत्पादन को बढ़ावा देने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से गोधन न्याय योजना की शुरूआत हरेली त्यौहार से होने जा रही है।

इस योजना के तहत शासन द्वारा निर्धारित दर पर किसानों एवं पशुपालकों गोबर की खरीदी की जाएगी। जिसके जरिए वृहद पैमाने पर वर्मी कम्पोस्ट खाद का उत्पादन किया जाएगा।

मंत्रिमण्डलीय उपसमिति इससे प्रबंधन के संबंध में कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से विस्तार से चर्चा की। बैठक में गोबर क्रय करने की पारदर्शी व्यवस्था तय करने की बात कही। गौठान समिति अथवा उसके द्वारा नामित समूह द्वारा घर-घर जाकर गोबर संग्रहण किया जाएगा।

उन्होंने इसके लिए खरीदी कार्ड की भी व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही, ताकि रोजाना संग्रहित किए जाने वाले गोबर की मात्रा और भुगतान की राशि का उल्लेख कार्ड में किया जा सके।

समिति ने किसानों और पशुपालकों में क्रय किए गए गोबर के एवज में पाक्षिक भुगतान किए जाने कीे भी अनुशंसा की है।

कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. एम. गीता एवं कृषि संचालक निलेश क्षीरसागर को गौठानों में पशुधन की संख्या और गौठान के रकबे को ध्यान में रखते हुए वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने के लिए कम से कम दस पक्के टांके का निर्माण शीघ्रता से कराए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पशुधन की संख्या और गौठानों में स्थान की उपलब्धता को देखते हुए टांके का निर्माण कराया जाना चाहिए।

समिति ने गोबर संग्रहण का दायित्व गौठान समिति अथवा महिला स्व-सहायता समूह को देने की बात कही। बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. एम. गीता ने गोधन न्याय योजना के तहत गोबर के संग्रहण से लेकर वर्मी कम्पोस्ट तैयार किए जाने के संबंध में गौठान समितियों एवं स्व-सहायता समूहों को प्रशिक्षण दिए जाने के बारे में विस्तार से जानकारी दी। नगरीय इलाकों में भी गोधन न्याय योजना के तहत गोबर की खरीदी नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा तथा वन क्षेत्रों में वन प्रबंधन समितियों के माध्यम से किया जाएगा।

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