संस्कार और संस्कृति की बात करने वाली भाजपा सरकार ने पूरे राज्य को शराबखाना बना दिया है और आरएसएस मौन है – रविन्द्र चौबे

रमन सिंह का बोनस तिहार किसानों के साथ छलावा – कांग्रेस

रायपुर :- कांग्रेस भवन रायपुर में उपस्थित पत्रकारों से अनौपचारिक चर्चा करते हुए पूर्व नेता प्रतिपक्ष रविन्द्र चौबे ने भाजपा और उसके मातृ संस्था आरएसएस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि दो दिन पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने राज्य सरकार के शराब बेचने के काम को लेकर भाजपा के मातृ संस्थान आरएसएस से कुछ प्रश्न पूछे थे कि हमेशा नैतिकता और संस्कार की बात करने वाला संघ राज्य में भाजपा सरकार के लगातार होते पतन पर चुप क्यों है? अगर ओ चुप है तो इसका सीधा मतलब है यहां जो कुछ हो रहा है उसमें संघ की पूरी तरह मिलीभगत है। यदि शराब कारोबार के कमीशन के 1500 करोड़ का मसला केबिनेट की बैठक में मंत्री उठाता है तो निश्चित रूप से यह माना जा सकता कि कमीशन का बड़ा हिस्सा नागपुर स्थित मुख्यालय तक पहुंच रहा है तभी तो इस पूरे मामले में संघ पूरी तरह मौन है।

2 साल पहले 367 शराब दुकानों को बंद करते समय सीएम रमनसिंह ने राज्य को पूर्ण शराबबंदी की ओर बढ़ते कदम की बात कही थी। सरकार को बीते साल साढ़े 3 हजार करोड़ से ज्यादा का राजस्व एक्ससाइज ड्यूटी के रूप में मिली थी। प्रदेश में हर वर्ष 40 से 45 हजार करोड़ का शराब का व्यवसाय होता है। इस साल पूरे प्रदेश में अवैध बिक्री और कोचियों को बंद करने के नाम पर बड़ी कंपनियों के शराब बेचने के लिए सरकार ने खुद शराब व्यवसाय करने का निर्णय ले लिया। सरकार के इस निर्णय पर आरएसएस चुप है। आर एस एस की चुप्पी से राज्य की जनता को समझ आने लगी है कि कही न कही कमीशन के खेल में संघ भी पूरी तरह लिप्त है। कितनी हिस्सेदारी पर आर एस एस की सहमति बनी है इस बारे में बड़ा प्रश्न भूपेश बघेल जी ने उठाया था किंतु उनके उठाये प्रश्न आज तक अनुत्तरित है।
आरएसएस के विजयादशमी के पथ संचलन पर पूरी सरकार संघ की शरण मे थी। संघ के भैयाजी जोशी ने उपदेश बहुत दिये, मगर शराब के बिक्री और कमीशन के मसले पर उनका मौन रहना हमारी संदेहों को एक प्रकार से पुष्टि करता है।

जनता को भी अब लगने लगा है कि भूपेश बघेल के आरोपों पर संघ की मौन स्वीकारोक्ति है। लेकिन बावजूद इसके राज्य की जनता के सामने संघ की ओर से इसका उत्तर आना ही चाहिए। हम यह भी जानना चाहते हैं कि रमन सरकार प्रदेश के शराब के व्यवसाय में किस-किस शराब निर्माता कंपनी के एजेंट के रूप में काम कर रही है? शराब निर्माताओं के कितने- कितने धनराशि का शराब सरकार इस साल बेच रही है? जो मुनाफा पूर्व में शराब के धंधे में छत्तीसगढ़ के ठेकेदार ले रहे थे, जिसके बारे में कैबिनेट मंत्री ने केबिनेट की बैठक में सवाल उठाया था। जनता यह जानना चाहती है कि यह मुनाफा नागपुर के रास्ते किसके जेब मे जा रहा है?

भैयाजी जोशी ने प्रदेश के किसानों की हालत पर चर्चा की, किन्तु किसानों के आत्महत्या के दौर पर टिप्पणी नहीं की। आज से सरकार बोनस तिहार मना रही है। आत्महत्या के दौर में बोनस तिहार का उत्सव मनाना अव्यवहारिक एवं निंदनीय है। सीएम को गलत फहमी है वे कहते हैं कि राज्य में किसान खुश है। यदि किसान खुश है तो फिर राज्य में किसानों की आत्महत्या का दौर क्यो नही थम रहा है? बोनस तिहार में केवल किसान को प्रवेश करने संबंधी कलेक्टर को दिया गया निर्देश बताता है कि यहाँ के किसान कितने आक्रोशित हैं और शायद उसका अहसास भी सरकार को भी हो गया है। बोड़ला ब्लॉक और खरोरा के किसान ने दशहरा के दिन आत्महत्या की। सीएम के पास इन किसानों के परिजन से मिलने का समय नहीं था। पूरा सरकारी अमला आत्महत्या करने वाले किसानों को गैर किसान साबित करने में लगी है। बीते सत्र में रामसेवक पैकरा ने विधानसभा में स्वीकार किया है 1271 किसानों ने आत्महत्या की है।

एक तरफ सरकार किसानों की आत्महत्या को स्वीकार कर रही है, उसके बाद भी सरकार का बोनस तिहार मनाने का निर्णय केवल चुनावी पैंतरेबाजी से ज्यादा कुछ नही लगता है। सरकार किसानों के लिए ईमानदार होती तो घोषणा के बाद का पूरा बोनस, 24 हजार 679 करोड़ देने में बिल्कुल देर न करती। राज्य की जनसंख्या का 85 प्रतिशत किसानों को केवल बजट का ढाई प्रतिशत हिस्सा देकर सरकार का कैसा त्योहार उत्सव समझ से परे है। राज्य के धान उत्पादक किसानों पर 3200 करोड़ और हार्टिकल्चर किसानों पर 800 करोड़ का लोन है। इस प्रकार किसानों का कर्ज 4 हजार करोड़ का है और केवल 21 सौ करोड़ का वितरण से किसानों का क्या भला होगा? प्रशासनिक रूप से यह चुनावी तैयारी है। केवल चुनाव की चिंता को ध्यान में रखकर ही पैतरा चला जा रहा है।

बोनस तिहार एक प्रदर्शन है, मोबाइल दिखाकर खाते में पैसा जाते हुए दिखाएंगे। गौ-हत्या पर फेस सेविंग के लिए बोनस की घोषणा हुई, क्योंकि बोनस बजट में शामिल नहीं था। पूरे प्रदेश के किसानों ने इस किसान विरोधी कमीशनखोर सरकार को बदलने का निर्णय ले लिया है।

Follow me in social media

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *