अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा हेतु जशपुर में कार्यशाला सम्पन्न


जशपुरनगर,
हम अभी जो पढ़ाई कर रहे हैं वो अनुपयोगी वर्ग के लिए है । विश्व समाज की मांग तेजी से बदल रही है, प्रत्येक 5 वर्ष में बदलाव हो रहा है । अतः मांग के अनुसार हमे पाठ्यक्रम बदलना होगा ताकि यहां के बच्चे उपयोगी वर्ग में सम्मिलित हो सके ।
उक्त विचार जिला कलेक्टर निलेश महादेव क्षीरसागर के मार्गदर्शन में यशस्वी जशपुर कार्यक्रम के तहत जिले के चयनित शिक्षकोें को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा प्रदान करने हेतु आयोजित कार्यशाला में निलेश धुगे विषय सहायक वासिम (महाराष्ट्र) ने व्यक्त किये । उन्होंने कहा कि हमें यह सोचना है कि हम विश्व समाज के मांग के अनुरूप अपने को नहीं बदल रहे हैं । हमें अनुपयोगी नहीं होना है तो अपडेट होना होगा और बच्चों को अन्तराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा प्रदान करना होगा ताकि बच्चा 21 वीं सदी की मांग अनुरूप तैयार हो कर उपयोगी साबित हो सके । इसके लिए बच्चों को स्वयं पढ़ने के लिए प्रेरित करना होगा । क्योंकि जब वह स्वयं पढ़ना प्रारंभ कर देगा तो वह बहुत कुछ सीख जायेगा। शिक्षक को बच्चों को सिखने के लिए चुनौती देना चाहिए क्योंकि जब बच्चा स्वयं पढ़ता है तो उसकी पढ़ने की गति ज्यादा होती है जबकि शिक्षक पढ़ता है तो गति कम होती है । बच्चे नई चींज ज्यादा गति से सिखते हैं । बच्चों को सदैव उनके स्तर से एक या दो स्तर ऊपर की चुनौती देनी चाहिए । जिन बच्चों ने चुनौती पुरी कर ली है तो उन्हें यह चुनौती देनी चाहिए कि वे कक्षा के वे बच्चे जिन्होने चुनौती पुरी नहीं की है उन्हें सिखायें । यदि शिक्षक द्वारा 15 दिन बच्चों को चुनौती दी जायेगी तो 16 वें दिन शिक्षक के लिए यह चुनौती होगी कि अब बच्चोें को क्या चुनौती दी जाये । उन्होंने बताया कि बच्चे मिलकर सिखते हैं तो ज्यादा गति से सिखते हैं इस कारण बच्चों को शिक्षामित्र ग्रुप बनाकर दी जावे । बच्चों में से ही विषयमित्र भी बनाना चाहिए । कक्षा 8 वीं में अध्ययनरत बच्चा यदि गणित में होशियार है तो उसे कक्षा 6 वीं में गणित विषय पढ़ाने का अवसर प्रदान करना चाहिए । हमें बच्चों की जिज्ञासु प्रवृति का सदैव सम्मान करना चाहिए । श्री धुगे ने कहा कि ऐसी व्यवस्था से एक तिहाई समय में पाठ्यक्रम पूर्ण करना हो जायेगा और बाकी समय लर्निग आउटकम हेतु कार्य करना चाहिए । शिक्षक को बच्चों को बताना चाहिए कि मोबाईल में गेम के अलावा क्या-क्या शैक्षणिक कार्य कर ज्ञानार्जन किया जा सकता है । उन्होंने कहा कि विद्यालय को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का बनाने के लिए कार्य करने के चार स्तर है, सबसे पहले शिक्षक के स्वयं के स्तर के कार्य को पूर्ण करना चाहिए इसके बाद के स्वयं व समाज साथी शिक्षक व पालकों के सहयोग से करना चाहिए । जब स्वयं व समाज के स्तर के कार्य पूर्ण हो जाये तो विद्यालय की भौतिक सुविधा हेतु कार्य करना चाहिए । इसके लिए भी स्वयं व समाज का सहयोग लेना चाहिए। अंत में प्रशासन के सहयोग से कार्य करना चाहिए ।
इस कार्यशाला में जिले के श्रेष्ठ 15 शिक्षकों ने उपस्थित होकर अन्तर्राष्ट्रीय शिक्षा पद्धति को बारिकी से समझाया है और अब दूसरे दिन से इसका क्रियान्वयन में प्रारंभ कर दिया गया है । विदित हो कि यह पहल जिले के कलेक्टर के मार्गदर्शन यशस्वी जशपुर कार्यक्रम के तहत की गई है । जिसमें प्राथमिक विद्यालय से हायर सेकेण्डरी विद्यालय स्तर के शिक्षक, व्याख्याता और प्राचार्य शामिल हुए । कार्यशाला में रायपुर, दुर्ग, बेमेतरा जिले के 08 शिक्षक अपने-अपने अन्तर्राष्ट्रीय शिक्षा पर किये जा रहे कार्यों के अनुभव के साथ सुनिल मिश्रा जी के नेतृत्व में इस पद्धति के अद्भूत आउटकम की जानकारी सभी से साझा किये । कार्यक्रम में जिला शिक्षा अधिकारी श्री एन. कुजूर, यशस्वी जशपुर के नोडल अधिकारी, सदस्य संजीव शर्मा, श्रोत पुरूष संजय दास उपस्थित रहे ।

Follow me in social media

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *