बंदियों को निःशुल्क विधिक सेवा का अधिकार जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने जेल का किया मुआयना


जषपुरनगर –

जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री भीष्म पाण्डेय ने बीते शुक्रवार को  जिला जेल जशपुर का औचक निरीक्षण कर वहां की व्यवस्था जायजा लिया। इस दौरान मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री मनीष दुबे तथा विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव श्री अमित जिंदल उनके साथ थे। ज्ञातव्य है कि जिला जेल जशपुर में  शुक्रवार को ही विधिक सेवा शिविर का आयोजन किया गया था।


जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने जेल के निरीक्षण के बाद वहां आयोजित विधिक सेवा शिविर में पहुंचे। शिविर में उपस्थित बंदियों से उन्होंने जिला जेल की व्यवस्था, भोजन, चिकित्सा सुविधा के बारे में भी जानकारी ली। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान में बंदियों को कई अधिकार प्रदान किए गए हैं। प्रत्येक बंदी से मानव गरिमा के अनुसार व्यवहार करना भारतीय संविधान का लक्ष्य है।  प्रत्येक बंदी को जेल में  ईलाज भोजन आदि की व्यवस्था तथा नियमानुसार अपने परिजनों से मिलने का अधिकार है। प्रत्येक बंदी को निःशुल्क विधिक सहायता प्राप्त करने का अधिकार है। यह अधिकार रिमांड स्तर से ही शुरू हो जाता है। शिविर में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री दुबे एवं सचिव श्री जिंदल ने बंदियों के हित संबंधि कानूनों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर सहायक जेल अधीक्षक  श्री विजयानंद सिंह एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।


इसके पश्चात् जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री पाण्डेय ने बाल संप्रेषण गृह जशपुर का मुआयना किया और यहां आयोजित विधिक सेवा शिविर को संबाधित करते हुए उन्होंने कहा कि संविधान ने बच्चों को अनेक अधिकारी प्रदान किए हैं। कल्याणकारी राज्य की संकल्पना तभी पूरी हो सकती है जब बच्चों को पूर्ण विकास का अवसर प्रदान किया जाए। उन्होंने कहा कि 14 साल से कम आयु के बच्चों को नियोजन में नहीं लगाया जा सकता है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री दुबे एवं सचिव श्री अमित जिंदल ने भी इस मौके पर बच्चों से संबंधित विधिक प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी।

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